यह भजन हमें जीवन की सच्चाई और जागरूकता का संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि मानव जीवन बहुत अनमोल है और इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। हमें अपने मन और हृदय को शुद्ध बनाकर सही रास्ते पर चलना चाहिए। थोड़ी-सी हिम्मत और समझ से हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। संयम और अच्छे विचारों से जीवन को सुंदर बनाना ही इस भजन का मुख्य संदेश है।
यह है जगने की बेला, क्यों अब सोना चाहिए?
🎶 लय – पाणी आया पुलांदे
✍🏻 रचयिता – आचार्यश्री तुलसी
यह है जगने की बेला, क्यों अब सोना चाहिए?
हृदय को धोना चाहिए, कि पावन होना चाहिए।।
मानव-तन-रत्न मिला है,
सचमुच सौभाग्य खिला है।
कौड़ी में इसको कभी न खोना चाहिए।।
थोड़ी-सी करके हिम्मत,
आंको जीवन की कीमत।
मक्खन पाने, पानी न बिलौना चाहिए।।
तर-करके सागर सारा,
अतिश्रम से मिला किनारा।
तट पर आ नैया को न डुबोना चाहिए।।
बिन समझे बात पकड़कर,
मिथ्या आग्रह में अड़कर।
सिर पर लोहे का भार न ढोना चाहिए।।
मन चाही मौजें ले लें,
चाहे ज्यों इससे खेलें।
यों जीवन होना नहीं खिलौना चाहिए।।
धरती तैयार पड़ी है,
मिलती उपदेश झड़ी है।
संयम का बीज यहाँ पर बोना चाहिए।।
अणुव्रत है महंगे मोती,
‘तुलसी’ जगमगती ज्योति।
जीवन-धागे में हार पिरोना चाहिए।।
यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन को समझदारी, संयम और जागरूकता के साथ जीना चाहिए। अपने अमूल्य जीवन को व्यर्थ न करें, बल्कि अच्छे कर्मों और सही मार्ग से इसे सफल बनाएं।
🙏जय जिनेंद्र🙏
