चेतन! चिदानन्द चरणां में, सब कुछ अरपण कर थांरो (Chetan! Chidanand Charno Mein Sab Kuch Arpan Kar Thaaro)

यह भजन आत्मा को जाग्रत करने वाला एक गहरा संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि मनुष्य को अपने जीवन को व्यर्थ बातों में न गँवाकर, सत्संग और संयम के मार्ग पर चलना चाहिए। संसार की वस्तुएँ क्षणिक हैं, इसलिए उनमें आसक्ति छोड़कर आत्मा के सच्चे आनंद की ओर बढ़ना ही सही मार्ग है। रचयिता आचार्यश्री तुलसी ने सरल शब्दों में जीवन का सच्चा उद्देश्य समझाने का प्रयास किया है। 

 

चेतन ! चिदानन्द चरणां में, सब कुछ अरपण कर थांरो

🎶 लय – वृन्दावन का कृष्ण कन्हैया

✍🏻 रचयिता – आचार्यश्री तुलसी

 

चेतन! चिदानन्द चरणां में, 

सब कुछ अरपण कर थांरो। 

सफल बणां तूं सत-संगत में, 

मूंघा मोलो मिनख जमारो।।

 

खाली हाथां आयो है तूं, 

जासी खाली हाथां रे, 

लारै रहसी इण दुनिया में, 

जस अपजस री बातां रे। 

थोड़े जीणे रै खातिर क्यूं, 

बांधै सिर पापां रो भारो।।

 

कोड्यां साटे अहल हार मत, 

ओ हीरो लाखीणो रे, 

विष मत घोल वासना रो, 

जो शान्त सुधारस पीणो रे। 

अति झीणो परमारथ रो पथ, 

तूं है नश्वर तन स्यूं न्यारो।।

 

भरयो अनन्त अखूट खजानो, 

गाफिल ! थांरै घर में रे, 

क्यूं न निहारै बारै-बारै, 

क्यूं भटकै दर-दर में रे। 

‘आग छिपी अरणी में ढूंढै, 

काठ काट मूरख कठिहारो’।।

 

एक नयो पैसो भी थांरै, 

नहीं चालसी सागै रे, 

करया आपरा कर्मां स्यूं ही, 

सुख-दुख मिलसी आगै रे। 

संजम रै मारग पर चाल्यां, 

‘तुलसी’ निश्चित है निस्तारो।।

 

यह भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन अनमोल है। सही मार्ग पर चलकर, पापों से बचकर और आत्मचिंतन करते हुए ही सच्चा सुख और मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏