दीपां रा दुलारा और प्यारा प्रभू आपां रा रे (Dipa Ra Dulara Aur Pyara Prabhu Aapa Ra Re)

यह भजन प्रभु और स्वामीजी के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने आराध्य को अपने जीवन का उजियारा और हृदय का आधार मानता है। स्वामीजी के गुण, जैसे पवित्रता, संयम और ज्ञान का सुंदर वर्णन किया गया है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति से मन को शांति मिलती है और जीवन का मार्ग सरल बनता है।

 

दीपां रा दुलारा और प्यारा प्रभू आपां रा रे

🎶 लय – मेरे मन की गंगा और तेरे मन की जमुना 

 

दीपां रा दुलारा और प्यारा प्रभू आपां रा रे,

सांवरिया स्वामी जी म्हारै रूं रूं में बसै।

जीवन रा उजियारा, और म्हांरा हार हियारा रे,

सांवरिया स्वामीजी म्हारै रूं रूं में बसै।।

 

गंगाजल सा पावन-उजला,

दूध जिसा भिक्षु स्वामी,

हा निर्लेप कमल-दल सरिखा,

घट-घट रा अंतर्यामी,

स्वामीजी रो नांव लियां,

हियो हुलसै सांवरिया।।

 

अति निर्मल संयम रा पजवा, 

बाबै री करड़ी करणी, 

श्रद्धा री प्रति-मूर्ति मनोहर, 

भवजल निधि तारण तरणी, 

स्वामीजी रै दर्शणां नै, 

जिवड़ो तरसै सांवरिया।।

 

तत्वातत्व बतावण कोई, 

आप जिसा विरला ज्ञानी, 

धर्मक्रांति कर सकै समय पर, 

आप जिसा कोई बलिदानी, 

नाम लेवतां हि कलि कलि, 

विकसै-सांवरिया।।

 

विघ्न विनाशक अनुपम शासक, 

प्रभु अति उत्तम आचारी, 

चरणां री जावां बलिहारी, 

लागी थांस्यूं इकतारी, 

थारै ही परताप सातूं सुख, 

बरसै सांवरिया।।

 

भिक्षु चरमोत्सव पर सारा, 

चरण स्पर्श अभिलाषी म्हे, 

श्रद्धांजलियां करां समर्पित, 

बणकर दृढ़ विश्वासी म्हे, 

मूंगा मैं घी दुलसी अबकै, 

म्हारे फलसै सांवरिया।।

 

यह भजन हमें स्वामीजी के प्रति प्रेम और आस्था को मजबूत करने की प्रेरणा देता है। अंत में भक्त पूरी श्रद्धा से समर्पण करता है और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख और शांति की कामना करता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏