मर्यादामय जीवन यह हमने पाया है (Maryadamay Jivan Yeh Humne Paya Hai)

यह प्रेरणादायक गीत तेरापंथ धर्मसंघ की मर्यादा, अनुशासन और आध्यात्मिक परंपरा का सुंदर परिचय देता है। इसमें संत-साध्वियों के संयममय जीवन, गुरु-भक्ति, सेवा, त्याग और भ्रातृत्व की भावना का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। गीत आचार्य भिक्षु, आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ के महान योगदान को स्मरण करते हुए संघ के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है। 

 

मर्यादामय जीवन यह हमने पाया है

🎶 लय – ऐ मेरे दिले नादां

✍🏻 रचयिता – मुनि बुद्धमल्लजी

 

मर्यादामय जीवन, यह हमने पाया है। 

उत्तम भैक्षव शासन, सुरतरु की छाया है।।

 

आत्मार्थी संत-सती, 

शोभा इस गण की है,

यह महके फुलवारी, 

संयम के प्रण की है।

भ्रातृत्व भावना का, 

सागर लहराया है।।

 

शासन की सेवा में, 

जीना है मरना है, 

उन्नति हो शासन की, 

हमको यह करना है। 

प्राणों के स्पन्दन में, 

यह भाव समाया है।।

 

गुरु का इंगित हमको, 

प्राणों से प्यारा है,

संयम की मर्यादा, 

अमृत की धारा है।  

धोरी बनकर हमने, 

यह भार उठाया है।।

 

स्वामीजी ने हमको, 

बलिदान सिखाया है, 

जय ने अनुशासन का, 

ध्रुव पाठ पढ़ाया है।  

‘तुलसी’ ने प्रज्ञा को, 

झकझोर जगाया है।।

 

‘महाप्रज्ञ’ मंत्रदाता, 

प्रेक्षा का मंत्र दिया, 

मानव के जीवन का, 

आलोकित पंथ किया। 

आत्मिक सद्भावों का, 

नव दीप जलाया है।।

 

छापर में ‘बुद्ध’ लगा, 

यह वर्धमान मेला, 

जन-जन के मन की है, 

उल्लास भरी वेला। 

मिल संघ-चतुष्टय ने, 

आनंद मनाया है।।

 

यह गीत मर्यादा, अनुशासन, सेवा और आत्मकल्याण के मूल्यों का संदेश देता है। गुरु परंपरा से मिली प्रेरणा और संघ के आदर्श जीवन को सार्थक बनाते हैं तथा निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करते हैं।

🙏जय जिनेंद्र🙏