मर्यादा रा गीत – धरती अम्बर समन्दर गावै (Maryada Ra Geet – Dharti Ambar Samandar Gaave)

यह गीत तेरापंथ धर्मसंघ की मर्यादा, अनुशासन और गौरवशाली परंपरा का भावपूर्ण गुणगान करता है। इसमें आचार्य भिक्षु के त्याग, जयाचार्य की दूरदर्शिता तथा संघ की एकता और पवित्रता का सुंदर वर्णन है। गीत बताता है कि मर्यादा ही संघ की शक्ति और पहचान है। गुरु आज्ञा, सदाचार और अनुशासन के मार्ग पर चलकर जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा इसमें निहित है। 

 

मर्यादा रा गीत - धरती अम्बर समन्दर गावै

🎶 लय – म्हांरी घूमर है

✍🏻 रचयिता – साध्वी यशोधराजी

 

धरती अम्बर समन्दर गावै मर्यादा रा गीत। 

जागी पुण्याई भारत भूमि री।।

 

बलिदानां री अमर कहाणी, 

शासन है ध्रुवतारो, 

खून-पसीने स्यूं गण सींच्यो, 

निरखण जिस्यो निजारो। 

बाबै भिक्षु रो पुण्य प्रताप, 

पायो ओ नवनीत।।

 

सचमुच आपां हां सौभागी, 

नन्दनवन ओ पायो, 

सदाबहार संघ आपणो, 

गणमाली मन भायो। 

चालै एक डोर में सगळा, 

राखे निर्मल नीत।।

 

गुरु आणा बिन हिले न पत्तो, 

आणा गण प्राकार, 

इणरी आणा लोपी बो-तो, 

डूब्यो काळी-धार। 

आयो शासण रै सरणै जो भी, 

गयो जमारो जीत।।

 

जयाचार्य री सूझबूझ रो, 

ओ अनुपम अवदान, 

अनुशासन रै राजमार्ग पर, 

शासन रथ गतिमान। 

इणरै कण-कण में गूंजै, 

अभिनव मर्यादा संगीत।।

 

संघ हिमालय री सुषमा लख, 

हियो हिलौरां खावै, 

बड़ा-बड़ा दिग्गज भी इणरा, 

सुण विधान चकरावै। 

गण है गंगा-सो उजळो-उजळो, 

गणपति परम पुनीत।।

 

यह गीत मर्यादा, समर्पण और संघ-निष्ठा का प्रेरक संदेश देता है। आचार्यों के आदर्शों से प्रकाशित यह परंपरा आज भी मानव जीवन को दिशा देती है और अनुशासित जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करती है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏