म्है तो शासन सेवा करस्यां (Mhe To Shasan Seva Karasya)

यह प्रेरणादायक गीत तेरापंथ धर्मसंघ के प्रति समर्पण, सेवा, त्याग और निष्ठा की भावना को व्यक्त करता है। इसमें धर्मसंघ को जीवन का आधार मानकर उसके लिए तन, मन और समय अर्पित करने का संकल्प दिखाई देता है। गीत आचार्य महाप्रज्ञ के प्रति श्रद्धा, अनुशासन के प्रति आस्था तथा अणुव्रत, नैतिकता और प्रेक्षा ध्यान के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने की प्रेरणा देता है। 

 

म्है तो शासन सेवा करस्यां

🎶 लय – सिरियारी रो सन्त

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी 

 

म्है तो शासन सेवा करस्यां

 

म्है तो शासन सेवा करस्यां, 

म्है तो शासन नै ही भरस्यां, 

गण में कुर्बाणी रो काम पड़े जद जोश जागै। 

म्हांनै महाप्रज्ञ दरबार प्यारो प्यारो लागे।।

 

शासण ही है वीणा और, 

शासण ही झंकार है, 

शासण है सगळां री शोभा, 

शासण रो आधार है, 

शासण रो ओ बड़लो देखो, 

कितनो छायादार है, 

शासण रो अनुशासन प्राण, 

मर्यादा श्रृंगार है, 

म्है बलिदान स्वयं रो देस्यां, 

जिम्मेदारी कांधां लेस्यां, 

म्है गणपति रा होकर रहस्यां, 

गण में कुर्बाणी रो काम पड़ै जद जोश जागै।।

 

पटवोजी-सी श्रद्धा राख्यां, 

ईं गण में सम्मान हुवै, 

गोठीजी री ज्ञान धारणा, 

पर सबनै अभिमान हुवै, 

शासण री ईं बलिवेदी पर, 

वफादार कुर्बान हुवै, 

खून स्यूं सिंच्योड़ा बीज, 

निश्चित ही फळवान हुवै, 

म्है तो नव इतिहास बणास्यां, 

साचो अब विश्वास जमास्यां, 

मिल-जुल बाबै रा गुण गास्यां, 

गण में कुर्बाणी रो काम पड़ै जद जोश जागै।।

 

महावीर री वाणी ऊपर, 

कुछ करके दिखलाणो है, 

सुप्त चेतना जाग उठै ज्यूं, 

ऐसो शंख बजाणो है, 

नयो मोरचो बणा, 

कार्यकर्ता में जोश जगाणो है, 

सौ बरसां री नींव लगावण, 

संगठन बणाणो है, 

वीर प्रभु रो मान बढ़ास्यां, 

घर-घर में अणुव्रत पहुंचास्यां, 

नैतिकता रा दीप जलास्यां, 

गण में कुर्बाणी रो काम पड़ै जद जोश जागै।।

 

साचो श्रावक सदा आतमां, 

रो ही राखै ध्यान है, 

आचारजां री दृष्टि नै जो, 

समझे जीवन प्राण है, 

व्यवहारां में नैतिकता और, 

दिल में दया महान है, 

दास हुवै साधु सतियां-रा, 

विनयवान गुणवान है, 

म्है तो अन्तर-ज्ञान जगास्यां, 

म्है तो प्रेक्षा-ध्यान लगास्यां, 

म्है तो शासण-शान बढ़ास्यां,

गण में कुर्बाणी रो काम पड़ै जद जोश जागै। 

म्हांनै महाप्रज्ञ दरबार प्यारो-प्यारो लागै।

 

यह गीत संघ-सेवा, बलिदान, नैतिकता और आत्मजागरण का संदेश देता है। धर्मसंघ के आदर्शों पर चलकर व्यक्ति स्वयं का विकास करता है और समाज में सद्भाव तथा चेतना का प्रसार करता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏