मन को शान्त बनाएं हम (Man Ko Shaant Banaye Hum)

यह गीत मन की शान्ति, समता और सजग जीवन का सुंदर संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि हर सांस के साथ परमात्मा का स्मरण करें, सुख-दुख और लाभ-हानि में समान भाव रखें तथा वर्तमान में जीना सीखें। कर्त्तव्य का पालन करते हुए फल की चिंता न करें। आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच के द्वारा जीवन को सरल, संतुलित और सफल बनाया जा सकता है। 

 

मन को शान्त बनाएं हम

🎶 लय – धर्म की लौ जलाएं हम 

✍🏻 रचयिता – राकेश मुनि

 

मन को शान्त बनाएं हम

सांस-सांस पर परमात्मा का, 

ध्यान लगाएं हम।।

 

जीवन है संग्राम वीरता से, 

जीना सीखें हम, 

अमृत व विष दोनों समता से, 

पीना सीखें हम। 

लाभ-अलाभ हर्ष-शोक में, 

सम बन जायें हम।।

 

वर्तमान में जीने का, 

अभ्यास बढ़ाते जायें, 

भूतकाल के चिन्तन में, 

हम समय नहीं गंवायें। 

प्रतिक्रिया के घावों से, 

निज को बचाएं हम।।

 

सहज भाव से हम अपना, 

कर्त्तव्य निभाते जायें, 

हो विश्वास अटल, 

पर फल की आशा नहीं सताये। 

आधि-व्याधि व उपाधि का, 

सब भार मिटाएं हम।।

 

बढ़े आत्म-विश्वास सदा, 

उल्लास भावना में हो, 

मिटे सभी तनाव, 

सजगता सदा साधना में हो। 

दुख के क्षण को भी सुख में, 

परिणत कर पायें हम।।

 

जो भी हो कर्त्तव्य भार, 

हम उसे सहर्ष निभाएं, 

‘मुनि राकेश’ किन्तु मानस को, 

भारी नहीं बनाएं। 

समता भाव बढ़ाकर जीवन, 

सफल बनाएं हम।।

 

यह रचना हमें सिखाती है कि शान्त मन, समता भाव और कर्त्तव्यनिष्ठ जीवन ही सच्ची सफलता का आधार हैं। आत्मविश्वास के साथ जीवन जीकर हम हर परिस्थिति को सुखद बना सकते हैं। 

🙏जय जिनेंद्र🙏