मिले तब जीवन में आनन्द (Mile Tab Jivan Mein Anand)

यह भजन जीवन में सच्चे आनन्द का सरल मार्ग बताता है। कवि बताते हैं कि जब मन शांत और स्थिर होता है, तब अच्छे गुणों की सुगन्ध फैलती है। सभी के प्रति मैत्री, ईर्ष्या का त्याग, करुणा, समता और संयम जैसे गुण जीवन को सुंदर बनाते हैं। यह रचना हमें प्रेम, सद्भाव और आत्म-विकास की प्रेरणा देती है तथा भीतर की खुशी का महत्व समझाती है। 

 

मिले तब जीवन में आनन्द

🎶 लय – भजन बिना पल-पल बीती जाये 

✍🏻 रचयिता – राकेश मुनि

 

मिले तब जीवन में आनन्द। 

चंचल मन जब स्थिर बन जाए, 

प्रगटे सुगुण सुगन्ध।।

 

सबसे मैत्री का अनुभव हो, 

वैर विरोध नहीं संभव हो। 

कटे स्वार्थ के बन्ध, 

मिले तब जीवन में आनन्द।।

 

गुण का ग्राहक मैं बन जाऊं, 

ईर्ष्या का विष दूर हटाऊं। 

उगै शान्ति का चन्द, 

मिले तब जीवन में आनन्द।।

 

सबके सुख-दुःख को पहचानूं, 

आत्म समान सभी को मानूं। 

हो न घृणा की गन्ध, 

मिले तब जीवन में आनन्द।।

 

सुख में समता दुःख में समता, 

हर क्षण में हर स्थिति में समता। 

दूर हटे सब द्वन्द्व, 

मिले तब जीवन में आनन्द।।

 

संयम का जो पथ है पाया, 

उसमें ही मंगल की छाया। 

बढ़े चरण अमन्द, 

मिले तब जीवन में आनन्द।।

 

यह भजन सिखाता है कि सच्चा आनन्द बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि शांत मन, अच्छे गुणों, समता और संयम में है। इन आदर्शों को अपनाकर जीवन सुखमय, सरल और मंगलमय बन सकता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏