यह प्रेरणादायक गीत आचार्य तुलसी के महान जीवन, तप, त्याग और लोककल्याणकारी कार्यों का सुंदर वर्णन करता है। इसमें उनके संयममय जीवन, अणुव्रत आंदोलन, नारी जागरण, जैन एकता और मानवीय मूल्यों के प्रसार को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया है। गीत बताता है कि आचार्य तुलसी ने अपने विचारों और नेतृत्व से समाज को नई दिशा दी तथा लोगों के जीवन में जागृति का प्रकाश फैलाया।
जपें हम तुलसी तुलसी नाम
🎶 लय – प्रभो! यह तेरापंथ महान
✍🏻 रचयिता – साध्वीप्रमुखा महाश्रमणीजी
जपें हम तुलसी तुलसी नाम।
जब तक सूरज-चांद गगन में,
अमर तुम्हारे काम।।
बालक वय में संयम पाया,
मिला सुगुरु वात्सल्य सवाया,
उसका पूरा मूल्य चुकाया,
ग्यारह वर्षों की वह यात्रा,
खुले नए आयाम।।
तरुण तेज तुलसी का अतिशय,
हुआ संघ में नव अरुणोदय,
घट-घट दीप जले ज्योतिर्मय,
मगन वचन से लगा सभी,
प्रश्नों पर पूर्ण विराम।।
ले मशाल अणुव्रत की कर में,
पहुंचे ढ़ाणी गांव-नगर में,
अलख जगायी दुनियां भर में,
रहे बांटते जीवन भर,
आलोक अमल निष्काम।।
जाग उठी परदे की नारी,
टूट गयी कुंठाएं सारी,
महिला जगत सदा आभारी,
करुणा सागर ने विकास के,
खोले क्षितिज तमाम।।
समझा मौसम के मिजाज को,
नई दृष्टियां दी समाज को,
बदला अनपेक्षित रिवाज को,
कठिन-कठिनतर कार्यों को भी,
दिया सफल अंजाम।।
जैन एकता का वह सपना,
था मंजूर घोर तप तपना,
नहीं कहीं भी आग्रह अपना,
सर्वधर्म-सद्भाव चेतना,
उसका प्रथम मुकाम।।
जीवन-मूल्यों के रखवारे,
असहायों के सबल सहारे,
कीर्तिमान अप्रतिम तुम्हारे,
आर्यदेव को आज समर्पित,
श्रद्धासिक्त प्रणाम।।
यह गीत आचार्य तुलसी के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान का भावपूर्ण अर्पण है। उनके जीवन-मूल्य, त्याग, दूरदृष्टि और लोककल्याणकारी कार्य आज भी समाज को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करते हैं।
🙏जय जिनेंद्र🙏
