जगत में मानव धर्म महान (Jagat Mein Manav Dharm Mahan)

यह प्रेरणादायक भजन मानव धर्म, प्रेम, मैत्री, सत्य और सदाचार का सुंदर संदेश देता है। साध्वी राजीमतीजी ने सरल शब्दों में बताया है कि केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार, सेवा, त्याग और आत्मनिर्माण से जीवन सफल बनता है। यह रचना धर्मों के बीच एकता, भाईचारे और मानवता को बढ़ावा देने की प्रेरणा देती है तथा मनुष्य को अपने भीतर झांकने का आह्वान करती है। 

 

जगत में मानव धर्म महान

🎶 लय – जगाया तुमको कितनी बार 

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी

 

जगत में मानव धर्म महान। 

श्रम सेवा बलिदान त्याग से, 

पाता नर सम्मान।।

 

बिना प्रेम भगवान कहां है, 

जहां मैत्री भगवान वहां है, 

प्रामाणिक का स्वर्ग यहां है। 

खुद को खोज खुदा बन जाओ, 

शास्त्रों का आह्वान।।

 

पढ़ते हैं सब आगम गीता,

फिर भी कैसे जीवन रीता, 

अब भी सोचो कैसे जीता। 

समय मांगता है अपने ही, 

जीवन का निर्माण।।

 

मतभेदों का विष मत घोलो, 

अन्तर मन की आंखें खोलो, 

सब धर्मों को सुंदर बोलो। 

खड़ी दीवारें धर्म क्षेत्र में, 

तोड़ रही इन्सान।।

 

सब धर्मों का सार एक है, 

सरल हृदय व्यवहार नेक है, 

सत्य शील की सही टेक है। 

भाई-भाई साथ मिलेंगे, 

होगा स्वर्ण विहान।।

 

मंदिर में जा भक्ति दिखाते, 

आदर्शों की बात बताते, 

व्यवहारों में खोट चलाते। 

शुद्ध चेतना के सागर में, 

क्यों उठते तूफान।।

 

यह भजन सिखाता है कि प्रेम, सत्य, सेवा और सद्भाव ही सच्चा धर्म हैं। जब मनुष्य अपने आचरण को शुद्ध करेगा और सभी को अपनाएगा, तब समाज में शांति, एकता और सुख का स्वर्णिम प्रभात आएगा।

🙏जय जिनेंद्र🙏