मन नै साफ राखीजै – रे चेतन! जीणो है दिन च्यार (Mann Ne Saaf Raakhije – Re Chetan! Jeeno Hai Din Chyaar)

यह भजन साध्वी राजीमतीजी द्वारा रचित एक सुंदर आध्यात्मिक रचना है। इसमें मन की शुद्धता, आत्म-जागृति और समता का सरल संदेश दिया गया है। कवयित्री चेतन आत्मा को संबोधित करते हुए बताती हैं कि जीवन बहुत छोटा है, इसलिए पाप, मोह और बुरी वृत्तियों से बचकर मन को निर्मल रखना चाहिए। यह भजन आत्मचिंतन, संयम और स्थिरता की प्रेरणा देता है। 

 

मन नै साफ राखीजै - रे चेतन! जीणो है दिन च्यार

🎶 लय – माता वंदनाजी री लाडली

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी

 

रे चेतन! 

जीणो है दिन च्यार, मन नै साफ राखीजै। 

रे मनवा! 

पापां रो ओ भार, सिर पर मतना बांधीजै।।

 

मन नै साफ राखणियां, 

तो कोई-कोई है। 

मैली वृत्त्यां पर नियंत्रण, 

पूरो-पूरो राखीजै।।

 

मन है चंदन-बाग, 

मन है कांटां री झाड़ी। 

मन है कल्प-वृक्ष री छाया, 

बैठ मौज मनाईजै।।

 

मन रै लारै-लारै चाल्यां, 

संकट भारी है। 

इणरी चलगत नै पीछाणे, 

बांरी संगत राखीजै।।

 

अपणै पग री शूल काढलै, 

मंजिल मिल ज्यासी। 

निर्मल मन ही सुख रो कारण, 

थोड़ो चेतो राखीजै।।

 

छुप-छुप करके पाप कस्योड़ा, 

कद तक छुपसी रे। 

मन री शुद्धि रो उपाय, 

पल-पल समता राखीजै।।

 

मन रै भीतर जातां जातां, 

मन खो ज्यावै है। 

रे पंछी! एक डाल पर बैठ, 

स्थिरता योग साधीजे।।

 

यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि निर्मल और शांत मन में है। मन को पवित्र, स्थिर और समभावयुक्त बनाकर ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏