आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो (Aaukhe Ri Ghadiya Thaari Ghatati Hi Jyave Ho)

यह प्रेरणादायक गीत जीवन की नश्वरता और समय के महत्व को समझाने वाला आध्यात्मिक संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है, इसलिए उसे धर्म, ध्यान और आत्मजागृति में लगाना चाहिए। गीत मनुष्य को मोह, राग-द्वेष और पाप से दूर रहकर समता, संयम और निर्मल भावनाओं को अपनाने की प्रेरणा देता है, जिससे जीवन सार्थक और सफल बन सके। 

 

आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो

🎶 लय – तेजा रे

✍🏻 रचयिता – राकेश मुनि

 

आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो, 

करलै कमाई धर्म ध्यान री। 

समय जो बीत ज्यावै पाछो नहीं आवै हो, 

ज्योति जगालै अन्तर ज्ञान री।।

 

सांस रे धागां स्यूं बण्यो जिन्दगी रो हार हो, 

टूटण में लागै नहीं देर हो। 

मन मोहक तसवीर थांरै तन री हो, 

बणसी आखिर माटी रो ढेर हो।।

 

आर्त्त रौद्र ध्यान रो मिटाले अंधारो हो, 

चाँद उगाले समता भाव रो। 

कर्योड़ा करमां रो फल भोगणो ही पड़सी हो, 

करलै उजाळो मंगल भाव रो।।

 

एकलो ही आयो है तूं एकलो ही जासी हो, 

साथ न जासी एक तार हो। 

मोह री मदिरा नै पी बण्यो क्यूं तू बावलो, 

पापां रो बांधे सिर क्यूं भार हो।।

 

आतमा री चादर नै ऊजली बणाले हो, 

संयम री साबण लेकर हाथ में। 

धूंओं राग-द्वेष रो उड़ै है च्यारूं ओर हो, 

रहजै सावधान दिन रात में।।

 

धर्म रे मारग में बढ़तो ही रहजे हो, 

मन में तूं रखजै निर्मल भावना। 

मुनि ‘राकेश’ बेड्यां टूट्यां कर्मा री हो, 

होसी सफल थांरी कामना।।

 

यह गीत हमें समय का सदुपयोग करने, आत्मा को शुद्ध बनाने और धर्ममार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। निर्मल भाव, संयम और सतत जागरूकता से ही जीवन की सच्ची सफलता प्राप्त होती है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏