यह प्रेरणादायक गीत आचार्य तुलसी के महान व्यक्तित्व, करुणामय जीवन और युगनिर्माणकारी कार्यों का भावपूर्ण गुणगान करता है। इसमें उन्हें नैतिक मूल्यों के संवाहक, मानवता के पथप्रदर्शक और समाज में नई चेतना जगाने वाले युगपुरुष के रूप में प्रस्तुत किया गया है। गीत बताता है कि उन्होंने साहस, करुणा और दूरदृष्टि के बल पर जन-जन के जीवन में आशा और प्रकाश फैलाया।
युगपुरुष आर्यवर! - युग की पीड़ा का विष पीकर
🎶 लय – जो नवयुग का निर्माण करे
✍🏻 रचयिता – साध्वीप्रमुखा महाश्रमणीजी
युग की पीड़ा का विष पीकर,
युगपुरुष आर्यवर कहलाये।
निश्छल निर्मल जीवन जीकर,
युगपुरुष आर्यवर कहलाये।।
नैतिक मूल्यों की पौध उगा,
बंजर भू को सरसब्ज किया।
अभिनव युग-धर्म प्रवर्तन कर,
युगपुरुष आर्यवर कहलाये।।
इमरत के अतल महासागर,
सद्गुण रत्नों के रत्नाकर।
जन-जन की अन्तर प्यास बुझा,
युगपुरुष आर्यवर कहलाये।।
साहस के महाहिमालय जो,
तूफानों में भी खड़े रहे।
आश्वासन दे मानवता को,
युगपुरुष आर्यवर कहलाये।।
करुणा के पावनतम निर्झर,
कल-कल पल-पल निर्बाध बहे।
संदेश सुना गतिमयता का,
युगपुरुष आर्यवर कहलाये।।
युगजीवन की अंगनाई में,
उजियारा बोने का प्रण ले।
आलोक दान कर दुनियां को,
युगपुरुष आर्यवर कहलाये।।
यह गीत आचार्य तुलसी के युगदृष्टा व्यक्तित्व को श्रद्धापूर्वक नमन करता है। उनके आदर्श, नैतिक संदेश और मानवता के प्रति समर्पण आज भी समाज को प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं।
🙏जय जिनेंद्र🙏
