मंगल स्तुति – ॐ मंगलं ओंकार मंगलं (Mangal Stuti – Om Mangalam Omkar Mangalam)

यह मंगल स्तुति जैन धर्म की एक अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण वंदना है। इसमें भगवान आदिनाथ, शांतिनाथ, महावीर स्वामी, नमोकार मंत्र, अर्हंत, सिद्ध, साधु, धर्म, गुरु तथा तेरापंथ धर्मसंघ के महान आचार्यों का मंगल स्मरण किया गया है। यह स्तुति मन में शांति, श्रद्धा और सकारात्मक भाव उत्पन्न करती है। इसके प्रत्येक शब्द में मंगल, कल्याण और आत्मिक उन्नति का संदेश छिपा है।

 

मंगल स्तुति - ॐ मंगलं ओंकार मंगलं

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

आदि मंगलं आदिनाथ मंगलं।

 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

शांति मंगलं शांतिनाथ मंगलं। 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

वीर मंगलं महावीर मंगलं।।

 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

नमो मंगलं नमोकार मंगलं। 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

अर्हम् मंगलं अर्हम् नाम मंगलं।।

 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

सिद्ध मंगलं सिद्धनाम मंगलं। 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

साधु मंगलं साधुनाम मंगलं।।

 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

धर्म मंगलं धर्म-ध्यान मंगलं। 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

गुरु मंगलं गुरुदेव मंगलं।।

 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

भिक्षु मंगलं भिक्षु स्वाम मंगलं। 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

तुलसी मंगलं तुलसीराम मंगलं।।

 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

महा मंगलं महाप्रज्ञ मंगलं। 

ॐ मंगलं ओंकार मंगलं, 

संघ मंगलं संघ-नाम मंगलं।।

 

यह मंगल स्तुति श्रद्धा, शांति और आत्मकल्याण का सुंदर संदेश देती है। इसके मधुर शब्द मन को पवित्र बनाकर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। 

🙏जय जिनेंद्र🙏