मंगल वीतराग भावना – राखो हिरदै में मंगल वीतराग भावना (Mangal Veetrag Bhawna – Rakho Hriday Mein Mangal Veetrag Bhawna)

यह भजन “मंगल वीतराग भावना” आत्मा में शुद्धता, भक्ति, वैराग्य और अहिंसा की भावना जगाने वाला सुंदर जैन भजन है। इसमें तीर्थंकरों, साधुओं और धर्म की महिमा का बहुत सरल और मधुर वर्णन किया गया है। भजन हमें अपने मन को पवित्र बनाने, अच्छे विचार अपनाने और आत्मकल्याण की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।

 

मंगल वीतराग भावना - राखो हिरदै में मंगल वीतराग भावना

🎶 लय – चमकै दुनिया में

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी

 

राखो हिरदै में मंगल वीतराग भावना, 

अपणो कल्याण करसी अपणी साधना, 

मंगल वीतराग भावना।।

 

जागै भीतर में शक्ति वर्धमान ज्यूं,

भक्ति हनुमान ज्यूं, विरक्ति भरत महान ज्यूं, 

मुक्ति जम्बू प्रधान ज्यूं, मंगल वीतराग भावना।।

 

रिषभ अजित संभव अभिनन्दन, 

सुमति पदम सुखकारी है, 

श्री सुपार्श्व चंदाप्रभु सुविधि, 

शीतल साताकारी है। 

हो प्रभुवर! मीठी लागै है वाणी, 

अमृत पान ज्यूं, मंगल वीतराग भावना।।

 

श्री श्रेयांस, वासु विमल जिन, 

श्री अनन्त धर्म शरणो, 

ॐ शान्ति, कुंथु, अर, मल्ली, 

मुनिसुव्रत अमृत झरणो। 

हो जिनवर! दीपै तीर्थंकर सारा, 

केवलज्ञान स्यूं, मंगल वीतराग भावना।।

 

नमि नेमि श्री पार्श्वनाथ, 

महावीर प्रभु है जयकारी, 

सीमंधर युगमंधर आदि, 

विहरमाण है भयहारी। 

हो जिनवर! मुक्ति पावै है उज्जवल, 

शुकल ध्यान स्यूं, मंगल वीतराग भावना।।

 

चत्तारि मंगल अरिहन्ता, 

सिद्धा साधु मंगल है, 

धर्म अहिंसा संयम तप स्यूं, 

बणै आतमा निर्मल है। 

हो गुरुवर! लागै जिनशासन सुन्दर, 

स्वर्ग विमान ज्यू, मंगल वीतराग भावना।।

 

ग्यारह गणधर सोलह सतियां, 

जैन संघ में नाम करयो, 

श्री भिक्षु रो बाग अनोखो, 

नन्दन-वन सो हार्यो भर्यो। 

हो स्वामी! मंगल महाप्रज्ञ चमकै, 

सूरज चांन ज्यूं, मंगल वीतराग भावना।।

 

यह भजन वीतरागता, भक्ति और आत्मकल्याण का संदेश देता है। इसके मधुर शब्द मन को शांति और श्रद्धा से भर देते हैं। “मंगल वीतराग भावना” हमें धर्म और संयम साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏