यह भक्ति गीत महान संत महाप्रज्ञ जी के गुणों, त्याग और जीवन यात्रा का सरल वर्णन करता है। इसमें उनके जन्म से लेकर ज्ञान प्राप्ति तक के महत्वपूर्ण प्रसंगों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है। गीत में उनकी महानता, संयम और जिन शासन के प्रति उनके योगदान को श्रद्धा से व्यक्त किया गया है। यह रचना श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, प्रेरणा और आदर की भावना जगाती है।
महाप्रज्ञ मतिमान हैं जिन शासन की शान हैं
🎶 लय – जिया बेक़रार है, छाई बहार है
महाप्रज्ञ मतिमान हैं,
जिन शासन की शान हैं।
विश्व संत के चरणों में,
नत मस्तक सकल जहान हैं।।
छोटे से टमकोर ग्राम में,
कोहिनूर को जन्म मिला।
तोलाराम तात वर माता,
बालूजी का भाग्य खिला।
योगी का फरमान है,
बालक पुण्य निधान हैं।।
तीन महीने के न हुए,
परलोक सिधारे पिता प्रवर।
वैरागी बनकर मां बेटे,
पहुंच गये सरदार शहर।
कालू करूणावान हैं,
संयम दिया महान है।।
नथू से मुनि नथमल बनकर,
किया शास्त्र अभ्यास हैं।
तुलसी के विद्यालय में पढ़,
पाया प्रखर प्रकाश हैं।
जागा अंतरज्ञान है,
प्रकटा प्रज्ञावान हैं।।
जन्म दिवस पर कोटि-कोटि,
अर्पित हैं मंगलकामना।
पग पग विजय वरो प्रभु,
मेरे सोमलता की भावना।
सफल सुखद अभियान हैं,
पूरा गण गतिमान है।।
यह भक्ति गीत महाप्रज्ञ जी के प्रेरणादायक जीवन को स्मरण कराता है। उनके आदर्श हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यह रचना श्रद्धा और भक्ति को और मजबूत बनाती है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
