यह भक्ति गीत विघ्न विनायक स्वरूप स्वामीजी के पवित्र नाम और उनके महान जीवन का सुंदर वर्णन करता है। इसमें उनके जन्म, त्याग, संघर्ष और धर्म के मार्ग को प्रकाशित करने की भावना को सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है। गीत श्रद्धा, समर्पण और सेवा के महत्व को समझाता है तथा तेरापंथ धर्म की स्थापना और विस्तार में उनके योगदान को उजागर करता है।
विघ्न विनायक मंगलदायक स्वामीजी रो नाम
🎶 लय – घूमर
✍🏻 रचयिता – मुनि श्री श्रेयांस
विघ्न विनायक, मंगलदायक,
स्वामीजी रो नाम।
श्रद्धा स्यूं जो जपे है उणरा,
सिद्ध हुवै सब काम।।
सिंह सपन स्यूं आया माता,
दीपांजी रे द्वार।
बोल्या गुरूजी भीखण ओ करसी,
सिंह री गुंजार।।
धुंधलायो जिण मारग ने,
उजाल्यो भिक्षु स्वाम।
देख्यो आगम दर्पण में मुखड़ो,
राजनगर रे धाम।।
सत रे खातिर संघ सुगुरू तज,
बगड़ी स्यूं प्रस्थान।
छेलो आश्रय बणियो है पहलो,
भिक्षु रो शमसान।।
लौह पुरूष जूंझया कष्टां स्यूं,
जीवन भर अविराम।
साखी अन्धेरी ओरी बगड़ी,
सिरियारी रा मुकाम।।
श्रद्धाशील समर्पण सेवा,
तेरापंथ बनाम।
‘मुनि श्रेयांस’ करै नित,
भिक्षु चरणां कोटि प्रणाम।।
यह भक्ति गीत स्वामीजी के त्याग और संघर्ष को याद दिलाता है। उनका जीवन हमें सेवा, समर्पण और धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह रचना श्रद्धा और भक्ति को और गहरा बनाती है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
