यह भजन प्रभु पारसनाथ के चरणों में लगी गहरी भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करता है। इसमें बताया गया है कि जब मन प्रभु के चरणों में लग जाता है, तो अज्ञान और अंधकार दूर हो जाता है और जीवन में प्रकाश फैलता है। भजन में प्रभु के जीवन, उनकी करुणा, तपस्या और उपदेशों का सरल वर्णन है। यह हमें सच्चे धर्म, भक्ति और आत्मज्ञान की ओर प्रेरित करता है और मन को शांति और आनंद देता है।
म्हारो मन पारस प्रभु रै चरणां में लाग्यो
🎶 लय – अपने पिया की मैं तो बनी रे जोगनिया
म्हारो मन पारस प्रभु रै चरणां में लाग्यो,
फैल्यो है आलोक अंधेरो दूर भाग्यो,
प्रभु रै चरणा में लाग्यो।।
अश्वसेन रा कुल उजियाला,
वामा देवी रा जाया,
काशीवासी ज्ञान विलासी,
जन जन रै मन में भाया,
भीतर स्यूं अनुभव वालो स्रोत जाग्यो।।
तापस री अज्ञान तपस्या,
देख सत्य-संधान कर्यो,
जलतै नाग-युगल नै दे,
नवकार मंत्र अपध्यान हर्यो,
धरणेन्द्र पद्मावती रो गौरव पाग्यो।।
दीक्षा धारी ध्यान लगायो,
कमठ उपद्रव गहरायो,
भक्तिभाव स्यूं देव सहायक,
बण कर मन में हरसायो,
वीतरागता पाई जीवन महाकाग्यो।।
चातुर्यामिक धर्म बतायो,
जन जीवन नै विकसायो,
संघ चतुष्टय रो अनुशासन,
जम्यो साधना रो पायो,
सारो जग श्री चरणां रै शरण आग्यो।।
पुरुषदानी पारस प्रभु रो,
चिंतामणी सो नाम खरो,
बुद्ध निरंतर ध्यावै,
पावै आत्मानंद सदा सखरो,
मन पर पूरो भक्ति भाव से रस छाग्यो।।
यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति से जीवन बदल सकता है। प्रभु के चरणों में श्रद्धा रखने से आत्मिक सुख मिलता है और मन शांत होता है। अंत में, यही भक्ति जीवन का सच्चा आनंद देती है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
