यह भजन भगवान पार्श्वनाथ के प्रति गहरी श्रद्धा, प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने जीवन को प्रभु के चरणों में अर्पित करने की भावना प्रकट करता है। भजन में भगवान की करुणा, समभाव, और वीतरागता का सुंदर वर्णन है। साथ ही, उनके जीवन की घटनाओं और उपदेशों को सरल भाषा में बताया गया है।
पारस प्रभुवर! थांरै चरणां में म्हे शीश झुकावां हां
🎶 लय – भूरिये रा काका
पारस प्रभुवर!
थांरै चरणां में म्हे शीश झुकावां हां,
लागी तन-मन साची प्रीत, जीवन भेंट चढ़ावां हां।।
अश्वसेन रा नंदन वामादे रा लाडला,
थांरै नाम री संकळाई पर, बलिहारी जावां हां।।
राग द्वेष में काल अनन्तों यूं ही बीतग्यो,
मिलग्यो वीतराग तूं देव, मूसळां ढोल बजावा हां।।
अज्ञानी तापस रो ठागो खोल्यो चोहटै,
थांरी सच्चाई रै साहस रा म्हे, गीत गावां हां।।
जलतै नाग-युगल नै दियो शरणो धर्म रो,
ऊंची करूणा रे इमरत रो कोई, पार न पावां हां।।
कमठ उपद्रव औ विनय भारी धरणेन्द्र रो,
थांरी आंख्यां रै समभाव रो म्हे, अलख जगावां हां।।
संकट मोचन वाळो तूं प्रभु साचो पारस है,
नाम रो ले उजळो आधार, भव-जल पार जावां हां।।
बीस जिनेश्वर सिद्धहुया आ धरती अति पावन हैं,
‘बुद्ध सम्मेत शिखर पर आज म्हे, स्तवना सुणावां हां।।
यह भजन हमें सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करने और उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान पार्श्वनाथ की भक्ति से जीवन में शांति, साहस और मोक्ष का मार्ग मिलता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
