यह गीत तेरापंथ संघ की महिमा, अनुशासन और एकता का सुंदर वर्णन करता है। इसमें संघ को मंदिर, तीर्थ और साधना का केंद्र बताया गया है, जहाँ श्रद्धा, सेवा और समर्पण की धारा निरंतर बहती है। आचार्य भिक्षु की मर्यादाओं, संतों के त्याग और तप की भावना को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। यह गीत हमें संघ के नियमों का पालन करने और धर्म मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
सौभागी संघ हमारा
🎶 लय – जहाँ जहाँ डाल डाल पर
सौभागी संघ हमारा,
जहां श्रद्धा, सेवा और समर्पण की बहती है धारा।।
संघ हमारा पावन मंदिर, यही देव यही पूजा,
यही जिनालय, यही शिवालय, तीर्थ न कोई दूजा,
इसके कण-कण में गूंजित है, जय भिक्षु का नारा।।
सौभागी संघ हमारा।
उन बलिदानी मुनि सतियों के, चरणों में सौ सौ वन्दन,
जिनके त्याग तपोबल से, गण, धूलि बनी है चन्दन,
गणनन्दन वन जिन्हें लगा, अपने प्राणों से प्यारा।।
सौभागी संघ हमारा।
धर्म क्रान्ति की ईटों से, यह संघ भवन निर्मित हैं,
ईंट-ईंट पर मर्यादा का, दिव्य मंत्र अंकित है,
प्राणवान यह संघ बना है, अनुशासन के द्वारा।।
सौभागी संघ हमारा।
संघ शीतघर लगता मनहर, ज्यों फूलों की घाटी,
मुस्कानों के झरनों से, सुजला सुफला यह माटी,
रेखा चित्र भिक्षु का, जय ने, इसको खूब निखारा।।
सौभागी संघ हमारा।
गण गणपति सम्बन्ध दिनों दिन, होता जाए गहरा,
करें सुरक्षा “निज पर शासन फिर अनुशासन” पहरा,
उपवन के हर पौधे को तुलसी का सबल सहारा।।
सौभागी संघ हमारा।
यह गीत तेरापंथ संघ की शक्ति, मर्यादा और अनुशासन को दर्शाता है। यह हमें सिखाता है कि संघ के मार्ग पर चलकर जीवन सफल और शांत बनता है। अंत में, संघ ही हमारा सच्चा मार्गदर्शक है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
