तप सुखकारी मंगलकारी हो तप री महिमा अति भारी (Tap Sukhkari Mangalkari Ho Tap Ri Mahima Ati Bhari)

यह रचना तपस्या के महत्व और उसके लाभों को सरल रूप में बताती है। इसमें कहा गया है कि तप सुख देने वाली और मंगल करने वाली है। तप से तन और मन के रोग दूर होते हैं और आत्मा उजली बनती है। सच्ची तपस्या के लिए साहस, धैर्य और आत्मसंयम जरूरी है। यह रचना हमें भूख, कठिनाई और इच्छाओं पर विजय पाने की प्रेरणा देती है। 

 

तप सुखकारी मंगलकारी हो तप री महिमा अति भारी

🎶लय – पीळो 

 

तप सुखकारी, मंगलकारी, 

हो तप री महिमा अति भारी, 

भव-भय हारी जी, 

तपस्या है तरणी।।

 

तन मन रा सब रोग मिटावै,

हो आत्माा ने ऊजळी बणावे, 

शिखर चढ़ावे जी तपस्या है तरणी।।

 

वीर पुरूष ही तप अपणावै, 

हो कष्टां स्यूं नहीं घबरावै, 

शौर्य दिखावे जी-तपस्या है तरणी।।

 

कायर री तो काया कंपावै,

हो नाम सुण्या घबरावै, 

शौर्य दिखावे जी-तपस्या है तरणी।।

 

भूख भुआजी जद घर आवै,

हो दिन में ही तारा दिख जावे, 

चक्कर खावे जी तपस्या है तरणी।।

 

बातां बणाणी भाई घणी है सोरी, 

हो रसना ने जीतणी है दोरी, 

बड़ी चटोरी जी तपस्या है तरणी।।

 

हिम्मत धारे बांरे आवे शुभ घड़ियां, 

हो छा जावे घर में रंगळियां, 

बेहद खुशियां जी-तपस्या है तरणी।।

 

देवे ‘प्रमोद थांने आज बधाई,

हो बढ़ता ही रहिज्यो सदाई, 

सुखदायी जी तपस्या है तरणी।।

 

यह रचना सिखाती है कि तपस्या कठिन जरूर है, लेकिन इसके फल सुखद और मंगलकारी हैं। साहस, संयम और हिम्मत से तप करने पर आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सच्ची खुशी आती है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏