श्री घंटाकर्ण महावीर मंत्र-स्तोत्र – अर्थ सहित (Shri Ghantakarna Mahavir Mantra-Stotra – With Meaning)

घंटाकर्ण महावीर स्तोत्र जैन परंपरा में श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यह स्तोत्र भय, रोग, बाधा और अनिष्ट से रक्षा की भावना से जपा जाता है। मान्यता है कि इसके पाठ से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। भक्त इसे विशेष रूप से संकट, रोग या भय के समय श्रद्धापूर्वक जपते हैं। यह स्तोत्र भक्ति, साहस और आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला माना जाता है।

 

श्री घंटाकर्ण महावीर मंत्र-स्तोत्र - अर्थ सहित

ॐ घंटाकर्णो महावीरः 

सर्वव्याधि-विनाशकः।

विस्फोटक भयं प्राप्ते, 

रक्ष-रक्ष महाबलः ॥

 

यत्र त्वं तिष्ठसे देव,

लिखितोऽक्षर-पंक्तिभिः।

रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति, 

वातपित्त कफोद्भवाः ॥ 

 

तत्र राजभयं नास्ति, 

यान्ति कर्णे जपात् क्षयम्।

शाकिनी-भूत वेताला, 

राक्षसाः प्रभवन्ति नो ॥

 

नाकाले मरणं तस्य, 

न च सर्पेण दृश्यते।

अग्नि चौर भयं नास्ति, 

नास्ति तस्य प्यरि-भयं ॥

 

ॐ ह्रीँ श्रीं घंटाकर्णो महावीर नमोऽस्तु ते ठः ठः ठः स्वाहा॥

 

श्री घंटाकर्ण महावीर मंत्र-स्तोत्र का अर्थ (Hindi & English Meaning)

ॐ घंटाकर्णो महावीरः
ॐ स्वरूप वाले घंटाकर्ण नामक महान वीर देव।
Om, the great heroic deity known as Ghantakarna.

 

सर्वव्याधि-विनाशकः।
जो सभी प्रकार की बीमारियों का नाश करते हैं।
The destroyer of all kinds of diseases.

 

विस्फोटक भयं प्राप्ते,

जब भयंकर रोग या महामारी का भय उत्पन्न हो।

When the fear of severe illness or epidemic arises.

 

रक्ष-रक्ष महाबलः ॥

हे महाबली देव! हमारी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए।

O mighty one, protect us, protect us.

 

यत्र त्वं तिष्ठसे देव,

हे देव! जहाँ आप निवास करते हैं।

O Lord, wherever you reside.

 

लिखितोऽक्षर-पंक्तिभिः।

जहाँ आपके नाम की अक्षरों में लिखी पंक्तियाँ होती हैं।

Where your name is written in lines of letters.

 

रोगास्तत्र प्रणश्यन्ति,

वहाँ सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।

There, diseases are destroyed.

 

वातपित्त कफोद्भवाः ॥

वात, पित्त और कफ से उत्पन्न रोग भी समाप्त हो जाते हैं।

Even diseases caused by vata, pitta, and kapha vanish.

 

तत्र राजभयं नास्ति,

वहाँ किसी प्रकार का राजकीय या शासकीय भय नहीं रहता।

There is no fear from rulers or authority there.

 

यान्ति कर्णे जपात् क्षयम्।

कान में इस मंत्र के जप से भय और कष्ट नष्ट हो जाते हैं।

By chanting this in the ear, fears and sufferings are destroyed.

 

शाकिनी-भूत वेताला,

शाकिनी, भूत और वेताल जैसे बाधक तत्त्व।

Shakini, spirits, and negative entities.

 

राक्षसाः प्रभवन्ति नो ॥

वे किसी प्रकार का प्रभाव नहीं डाल पाते।

They have no power or influence.

 

नाकाले मरणं तस्य,

उस व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती।

That person does not suffer untimely death.

 

न च सर्पेण दृश्यते।

और उसे सर्प से भय या हानि नहीं होती।

Nor is he harmed by snakes.

 

अग्नि चौर भयं नास्ति,

अग्नि और चोर का भी कोई भय नहीं रहता।

There is no fear of fire or thieves.

 

नास्ति तस्य प्यरि-भयं ॥

उस व्यक्ति को शत्रुओं का भी भय नहीं होता।

That person has no fear of enemies.

 

ॐ ह्रीँ श्रीं घंटाकर्णो महावीर नमोऽस्तु ते ठः ठः ठः स्वाहा॥

ॐ, ह्रीँ, श्रीं सहित घंटाकर्ण महावीर को मेरा नमन है – उनकी दिव्य शक्ति से रक्षा हो।

Om, Hreem, Shreem – salutations to Ghantakarna Mahavir; may his divine power protect.

 

यह स्तोत्र घंटाकर्ण महावीर की रक्षा-शक्ति और करुणा को प्रकट करता है। श्रद्धा से इसके पाठ और स्मरण से भय, रोग और बाधाएँ दूर होती हैं तथा साधक के जीवन में शांति और सुरक्षा बनी रहती है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏