“चइत्ता भारहं वासं” – शान्तिस्तुति मंत्र – अर्थ सहित (“Chaitta Bharaham Vaasam” – Shanti Stuti Mantra – With Meaning)

चइत्ता भारहं वासं – शान्तिस्तुति मंत्र जैन आगमिक परंपरा से जुड़ा हुआ एक भावपूर्ण स्तुतिवचन है। इसमें त्याग, वैराग्य और तपस्या का आदर्श भाव व्यक्त होता है। यह मंत्र मन को शांति देने वाला है और जैन धर्म के उच्च नैतिक मूल्यों की स्मृति कराता है। 

 

शान्तिस्तुति मंत्र

चइत्ता भारहं वासं, चक्कवट्टी नराहिओ।

चइत्ता उत्तमे भोए,  महापउमे तवं चरे।।

 

Chaitta bharaham vaasam, chakkavatti narahio.
Chaitta uttame bhoe, mahapaume tavam chare.

 

Another Version (अन्य संस्करण) – 

चइत्ता भारहं वासं, चक्कवट्टी महिड्डिओ। 

संती संतिकरे लोए, पत्तो गइमणुत्तरं।।

 

Chaitta bharaham vaasam, chakkavatti mahiddio.

Santi santikare loe, patto gaimanuttaram.

 

चइत्ता भारहं वासं - शान्तिस्तुति मंत्र का अर्थ (Hindi & English Meaning)

चइत्ता भारहं वासं,
भारी वैभव और निवास को छोड़कर।
Abandoning immense luxury and residence.

 

चक्कवट्टी नराहिओ।
चक्रवर्ती राजा भी।
Even a universal emperor.

 

चइत्ता उत्तमे भोए,
उत्तम भोगों को त्यागकर।
Renouncing the finest pleasures.

 

महापउमे तवं चरे।।
महान तप का आचरण करता है।
Practices great austerity.

 

Another Version (अन्य संस्करण) – 

चइत्ता भारहं वासं,
भारी वैभव और निवास को छोड़कर।
Abandoning immense luxury and residence.

 

चक्कवट्टी महिड्डिओ।
महान वैभवशाली चक्रवर्ती भी।
Even a highly prosperous universal emperor.

 

संती संतिकरे लोए,
जो संसार में शांति और कल्याण करता है।
Who brings peace and welfare in the world.

 

पत्तो गइमणुत्तरं।।
वह उत्तम गति (मोक्ष) को प्राप्त करता है।
He attains the highest state (liberation).

 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏