सत्यवादिता सझै न थांस्यूं तो रहणों चुपचाप है (Satyavadita Sajhe Na Thasyu To Rehno Chupchaap Hai)

यह रचना आचार्यश्री तुलसी द्वारा लिखी गई है, जिसमें सत्य बोलने का महत्व समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि झूठ बोलना बड़ा पाप है और एक झूठ को छुपाने के लिए कई झूठ बोलने पड़ते हैं। कवि ने सरल और सच्चा जीवन जीने की प्रेरणा दी है। साथ ही, समाज और राजनीति में फैल रहे कपट और दिखावे पर भी प्रकाश डाला है।

 

सत्यवादिता सझै न थांस्यूं तो रहणों चुपचाप है

🎶 लय – बाजरै री रोटी पोई

✍🏻 रचयिता – आचार्यश्री तुलसी 

 

सत्यवादिता सझै न थांस्यूं, 

तो रहणों चुपचाप है।

कपटाई कर झूठ बोलणो, 

जग में मोटो पाप है।।

 

एक झूठ नै ढांकण, 

कित्ती झूठ पड़े है बोलणी, 

दांवपेच कर गळ्यां-घूंचळ्यां, 

कित्ती पड़ै टटोळणी। 

फसा-दूसरै नै फंदै में, 

बचणो चावै आप है।।

 

सांच-झूठ सब भूल ठगै, 

औरां नै बैठ बाजार में, 

लेई-बेची घाई-पेची, 

चालै कारोबार में। 

कूड़-कपट कर ज्यूं-त्यूं अपणी, 

राखी चावै छाप है।।

 

आजकल री राजनीति में, 

जो पेचीदी चाल है, 

कहणी और, और ही करणी, 

बात-बात में जाल है। 

ज्यूं-त्यूं कुरसी पाणै री धुन, 

मानवता नै श्राप है।।

 

एक बार तो झूठ-साच कर, 

काम सारलै आप रो, 

मोड़ो बेगो फूट्यां सरसी, 

घड़ो भरीज्यां पाप रो। 

आं लखणां स्यूं आखिर आवै, 

पांती पश्चात्ताप है।।

 

थोड़े जीणै रे खातिर, 

क्यूं करै अणूंता काम तूं, 

सरल बणा तन मन वाणी नै, 

जो चावै आराम तूं। 

‘तुलसी’ परभव में नहिं, 

पोपांबाई रो इन्साफ है।।

 

यह रचना हमें सिखाती है कि सत्य और सादगी ही सही जीवन का आधार हैं। झूठ और कपट से अंत में पछतावा ही मिलता है। इसलिए हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलना चाहिए। 

🙏जय जिनेंद्र🙏