नमो अरहन्तं नमो भगवन्तं (Namo Arhantam Namo Bhagavantam)

यह भजन अरिहंत प्रभु, भगवंत और त्यागी गुरुओं की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। इसमें उनकी समता, धैर्य, ज्ञान, तप और करुणा को सरल शब्दों में बताया गया है। रचयिता साध्वी राजीमतीजी ने भक्ति भाव से प्रभु के गुणों का गान किया है। यह भजन हमें राग-द्वेष छोड़कर समभाव और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। 

 

नमो अरहन्तं नमो भगवन्तं

🎶 लय – बाबो अलबेलो 

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी

 

नमो अरहन्तं, नमो भगवन्तं। 

पार लगाए नौका, 

नमो महामन्तं।।

 

राग न द्वेष जिसमें, समता सुहाए, 

एक ही घाट बकरी, शेर आए जाए। 

महिमा निराली प्रभु की, 

नमो धैर्यवन्तं।।

 

कोई न भाये तुमको, दिल में बिठाऊं, 

रात दिवस क्या, पल-पल ध्याऊं। 

अपने बराबर करलो, 

नमो सिद्धिवन्तं।। 

 

एक जनम क्या, लाखों सुधारे, 

व्याधि, उपाधि, आधि, सबसे उबारे। 

तीर्थपति के प्रतिनिधि, 

नमो त्यागवन्तं।।

 

महावीर वचनों के, ज्ञाता प्रवक्ता,

अनमोल रतनों के, दाता प्रदाता। 

शास्त्रों के रक्षक, शिक्षक, 

नमो ज्ञानवन्तं।। 

 

उज्जवल है काया जिनकी, पावन वाणी, 

मन के विकार मिट गए, तप की निशाणी। 

समता शिखर पर बैठे, 

नमो सव्वसन्तं।।

 

यह भजन प्रभु और गुरुओं के दिव्य गुणों का स्मरण कराता है। इसके भाव मन में श्रद्धा, शांति और समता जगाते हैं। इसे गाने और सुनने से आत्मकल्याण की प्रेरणा तथा भक्ति का भाव बढ़ता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏