मनावां हिलमिल सारा आज म्हें तो तपस्या रो त्यौहार (Manawa Hilmil Sara Aaj Mhe To Tapasya Ro Tyohar)

यह रचना तपस्या के महत्व और उसकी शक्ति को सरल रूप में समझाती है। इसमें बताया गया है कि तप जीवन का आधार है और कठिन रास्ते पर चलने से जीवन में निखार आता है। तपस्या दुख, रोग और कठिन परिस्थितियों से लड़ने का आत्मबल देती है। प्रेम, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ किया गया सही तप जीवन को सुंदर, मजबूत और सार्थक बनाता है। 

 

मनावां हिलमिल सारा आज म्हें तो तपस्या रो त्यौहार

🎶लय – गावां हिलमिल सारा 

 

मनावां… हिलमिल सारा आज म्हें तो, 

तपस्या रो त्यौहार।  

तपस्या रो त्यौहार, तप है जीवन रो आधार।।

 

तप रै मार्ग ऊपर चलणो, 

बहुत बड़ो है भारी, 

इण पर चलणे स्यूं आवेला, 

थांरे जीवन में निखार। 

जीवन में निखार, 

तप है जीवन रो आधार।।

 

कांटा सो ओ जीवन थांरो, 

फूलां सो बण ज्यासी, 

यदि करस्यो तपस्या स्यूं थे, 

थोड़ो सो भी प्यार। 

थोड़ो सो भी प्यार, 

तप है जीवन रो आधार।।

 

बड़ा-बड़ा रोगां री दवाई, 

तपस्या घणी सान्तरी, 

डूबी नावड़ली भी हो जावेला, 

तपस्या स्यूं पार। 

तपस्या स्यूं पार, 

तप है जीवन रो आधार।।

 

आत्मबल रो तप रै खातिर, 

दीयो जगाणो पड़सी, 

केवै तेयुप सुणल्यो तप ही है, 

जीवन रो श्रृंगार। 

जीवन रो श्रृंगार, 

तप है जीवन रो आधार।।

 

यह रचना हमें सिखाती है कि तपस्या से आत्मबल, धैर्य और जीवन में सुंदरता आती है। कठिन समय में भी तप का मार्ग अपनाकर मनुष्य अपने जीवन को बेहतर, मजबूत और सफल बना सकता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏