महावीर अष्टक स्तोत्र जैन धर्म का एक अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण स्तोत्र है, जिसकी रचना कविवर पण्डित भागचन्द जी ने की है। इस स्तोत्र में भगवान महावीर के अनंत ज्ञान, शांति, करुणा, वैराग्य और दिव्य गुणों का वर्णन किया गया है। प्रत्येक श्लोक भगवान महावीर के आदर्श जीवन और उनके आध्यात्मिक स्वरूप का स्मरण कराता है। श्रद्धा और भक्ति से इसका पाठ मन को शांति, प्रेरणा और आत्मकल्याण की दिशा प्रदान करता है।
महावीर अष्टक स्तोत्र - अर्थ सहित
✍🏻 रचयिता – कविवर पण्डित भागचन्द जी
यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचितः,
समं भान्ति ध्रौव्य-व्यय-जनि-लसन्तोऽन्तर्हिताः।
जगत्-साक्षी मार्गप्रकटनपरो भानुरिव यो,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
अताम्रं यच्चक्षुःकमलयुगलं स्पन्दरहितं,
जनान् कोपाभावं प्रकटयति वाऽभ्यन्तरमपि।
स्फुटं मूर्तिर्यस्य प्रशमितमयी चातिविमला,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
नमन्नाकेन्द्राली-मुकुट-मणिभा-जालजटिलं,
लसत्पादाम्भोजद्वयमिह यदीयं तनुभृताम्।
भवज्वालाशान्त्यै प्रभवति जलं वा स्मृतमपि,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
यदर्चाभावेन प्रमुदितमना दर्दुर इह,
क्षणादासीत् स्वर्गी गुणगणसमृद्धः सुखनिधिः।
लभन्ते सद्भक्ताः शिव-सुख-समाजं किमु तदा,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
कनत्स्वर्णाभासोऽप्यपगततनुर्ज्ञाननिवहो,
विचित्रात्माऽप्येको नृपतिवर-सिद्धार्थ-तनयः।
अजन्माऽपि श्रीमान् विगत-भवरागोऽद्भुतगतिर्,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
यदीया वाग्गङ्गा विविध-नयकल्लोल-विमला,
बृहज्ज्ञानाम्भोभिर्जगति जनतां या स्नपयति।
इदानीमप्येषा बुधजन-मरालैः परिचिता,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
अनिर्वारोद्रेकस्त्रिभुवनजयी कामसुभटः,
कुमारावस्थायामपि निजबलाद्येन विजितः।
स्फुरन्नित्यानन्द-प्रशमपदराज्याय स जिनः,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
महामोहातङ्क-प्रशमन-पराकस्मिक-भिषक्,
निरपेक्षो बन्धुर्विदितमहिमा मङ्गलकरः।
शरण्यः साधूनां भव-भयभृतामुत्तमगुणी,
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
महावीराष्टकं स्तोत्रं, भक्त्या भागेन्दुना कृतम्।
यः पठेच्छृणुयाच्चापि, स याति परमां गतिम्।।
महावीर अष्टक स्तोत्र का अर्थ (Hindi & English Meaning)
यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचितः,
जिनके चैतन्य में चेतन और अचेतन सभी पदार्थ दर्पण की भाँति प्रतिबिंबित होते हैं।
In whose consciousness all living and non-living entities are reflected like images in a mirror.
समं भान्ति ध्रौव्य-व्यय-जनि-लसन्तोऽन्तर्हिताः।
जहाँ उत्पाद, व्यय और ध्रौव्य सहित सभी अवस्थाएँ एक साथ भीतर समाई हुई प्रकाशित होती हैं।
Where origination, destruction, and permanence shine together while remaining inherently contained within.
जगत्-साक्षी मार्गप्रकटनपरो भानुरिव यो,
जो सूर्य के समान जगत को मोक्षमार्ग दिखाने वाले साक्षी हैं।
Who, like the sun, reveals the path of liberation to the world.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
अताम्रं यच्चक्षुःकमलयुगलं स्पन्दरहितं,
जिनकी कमल समान आँखें अत्यंत शांत और निश्चल हैं।
Whose lotus-like eyes are perfectly calm and motionless.
जनान् कोपाभावं प्रकटयति वाऽभ्यन्तरमपि।
जो लोगों को यह प्रकट करती हैं कि उनके भीतर क्रोध का पूर्ण अभाव है।
They reveal to the people the complete absence of anger within him.
स्फुटं मूर्तिर्यस्य प्रशमितमयी चातिविमला,
जिनकी मूर्ति शांति और निर्मलता की साक्षात् प्रतिमूर्ति है।
Whose form is the very embodiment of peace and purity.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
नमन्नाकेन्द्राली-मुकुट-मणिभा-जालजटिलं,
जिनके चरणों पर झुकते देवों के मुकुटों की मणियों का प्रकाश बिखरता है।
The radiance of jewels from celestial crowns shines upon His feet as gods bow before Him.
लसत्पादाम्भोजद्वयमिह यदीयं तनुभृताम्।
जिनके दोनों चरणकमल समस्त जीवों के लिए शोभायमान हैं।
His two lotus feet shine gloriously for all living beings.
भवज्वालाशान्त्यै प्रभवति जलं वा स्मृतमपि,
जिनका केवल स्मरण भी संसार की ज्वाला को शांत करने के लिए जल के समान कार्य करता है।
Even His remembrance acts like water to extinguish the burning fire of worldly existence.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
यदर्चाभावेन प्रमुदितमना दर्दुर इह,
जिनकी पूजा के भाव मात्र से प्रसन्नचित्त हुआ एक मेंढक भी यहाँ।
Even a frog, whose mind was delighted merely by the feeling of devotion toward Him.
क्षणादासीत् स्वर्गी गुणगणसमृद्धः सुखनिधिः।
क्षणभर में स्वर्गगामी होकर गुणों और सुखों का भंडार बन गया।
Instantly attained heaven and became rich in virtues and happiness.
लभन्ते सद्भक्ताः शिव-सुख-समाजं किमु तदा,
तो सच्चे भक्तों को मिलने वाले परम सुख का क्या कहना।
Then how much greater must be the bliss attained by true devotees.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
कनत्स्वर्णाभासोऽप्यपगततनुर्ज्ञाननिवहो,
जो स्वर्ण के समान तेजस्वी होते हुए भी शरीर से परे और ज्ञान के भंडार हैं।
Though radiant like gold, He is beyond bodily existence and a treasury of infinite knowledge.
विचित्रात्माऽप्येको नृपतिवर-सिद्धार्थ-तनयः।
जो अद्भुत आत्मा होते हुए भी राजा सिद्धार्थ के पुत्र थे।
Though extraordinary, He was born as the son of King Siddhartha.
अजन्माऽपि श्रीमान् विगत-भवरागोऽद्भुतगतिर्,
जो वास्तव में जन्म-मरण से परे, संसार के राग से रहित और अद्भुत स्वरूप वाले हैं।
He is beyond birth, free from worldly attachment, and of wondrous nature.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
यदीया वाग्गङ्गा विविध-नयकल्लोल-विमला,
जिनकी वाणी रूपी गंगा विविध नयों की निर्मल तरंगों से युक्त है।
His speech is like the Ganges, pure and flowing with the waves of many viewpoints.
बृहज्ज्ञानाम्भोभिर्जगति जनतां या स्नपयति।
जो अपने विशाल ज्ञानरूपी जल से संसार के लोगों को पवित्र करती है।
It bathes the people of the world in the waters of vast knowledge.
इदानीमप्येषा बुधजन-मरालैः परिचिता,
जो आज भी विद्वान रूपी हंसों द्वारा आदरपूर्वक जानी और ग्रहण की जाती है।
Even today, this Ganges of speech is cherished by wise scholars who are like swans.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
अनिर्वारोद्रेकस्त्रिभुवनजयी कामसुभटः,
तीनों लोकों को जीतने वाला प्रबल कामदेव भी।
Even the mighty warrior of desire who conquers the three worlds.
कुमारावस्थायामपि निजबलाद्येन विजितः।
जिनके द्वारा किशोरावस्था में ही अपने आत्मबल से जीत लिया गया।
Was conquered by Him through His own inner strength even in His youth.
स्फुरन्नित्यानन्द-प्रशमपदराज्याय स जिनः,
वे जिनेन्द्र शाश्वत आनंद और परम शांति के राज्य के स्वामी बने।
That Jina attained the kingdom of eternal bliss and supreme peace.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
महामोहातङ्क-प्रशमन-पराकस्मिक-भिषक्,
जो महान मोह रूपी रोग का तुरंत उपचार करने वाले दिव्य वैद्य हैं।
He is the divine physician who instantly cures the terrible disease of delusion.
निरपेक्षो बन्धुर्विदितमहिमा मङ्गलकरः।
जो बिना किसी अपेक्षा के सबके हितैषी और मंगलकारी हैं।
He is a selfless friend whose glory brings auspiciousness.
शरण्यः साधूनां भव-भयभृतामुत्तमगुणी,
जो साधुओं और संसार के भय से पीड़ित जीवों के श्रेष्ठ शरणदाता हैं।
He is the refuge of monks and all beings afflicted by worldly fear.
महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे।।
वे भगवान महावीर सदैव मेरी दृष्टि और स्मरण में बने रहें।
May Lord Mahavir always remain before my eyes and in my remembrance.
महावीराष्टकं स्तोत्रं, भक्त्या भागेन्दुना कृतम्।
यह महावीर अष्टक स्तोत्र भक्तिभाव से भागेन्दु द्वारा रचा गया है।
This Mahavir Ashtak Stotra was composed with devotion by Bhagendu.
यः पठेच्छृणुयाच्चापि, स याति परमां गतिम्।।
जो इसका पाठ करता है या सुनता है, वह परम गति को प्राप्त करता है।
Whoever recites or listens to it attains the supreme spiritual state.
यह स्तोत्र घंटाकर्ण महावीर की रक्षा-शक्ति और करुणा को प्रकट करता है। श्रद्धा से इसके पाठ और स्मरण से भय, रोग और बाधाएँ दूर होती हैं तथा साधक के जीवन में शांति और सुरक्षा बनी रहती है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
