महाप्रज्ञ अर्चना – करते वन्दन हम अभिनन्दन (Mahapragya Archana – Karte Vandan Hum Abhinandan)

यह श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत गीत साध्वी राजीमतीजी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य महाप्रज्ञ के महान व्यक्तित्व, प्रज्ञा, साधना और आध्यात्मिक योगदान का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। गीत में उनकी प्रेक्षा साधना, आत्मदर्शन की प्रेरणा, संघ के प्रति समर्पण तथा मानवता के लिए किए गए कार्यों को स्मरण किया गया है। यह रचना उनके प्रति कृतज्ञता, सम्मान और श्रद्धा का सुंदर प्रतीक है।

 

महाप्रज्ञ अर्चना - करते वन्दन हम अभिनन्दन बालू सुत महाप्रज्ञ

🎶 लय – मिलो ना तुम तो

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी

 

करते वन्दन हम अभिनन्दन, 

बालू सुत महाप्रज्ञ। 

भाव से वन्दना है, भक्ति से अर्चना है।।

 

लाखों की पाई तुमने, 

एक पलक में श्रद्धा भावना, 

ऐसी अनोखी विभुता, 

अमर रहे यह सबकी कामना। 

भाग्य सरायें, नहीं भुलाएं, 

तुलसी का उपकार।।

 

प्रज्ञा के देवता में, 

जग का भरोसा अपरम्पार है, 

प्रतिभा के द्वार खोलें, 

वही तो बनेगा गण श्रृंगार है। 

सत्य समीक्षा, संघ सुरक्षा, 

करते ज्यों मंदार।।

 

तुमने जगाई गण में, 

आत्मा के दर्शन की नव चेतना, 

प्रेक्षा की साधना से, 

करनी है अपने मन की एषणा। 

महा समन्दर, जैसे अन्दर, 

कितने गहन विचार।।

 

श्रद्धा से हो नत-मस्तक, 

आज उतारें तेरी आरती, 

चारों दिशाएं, धरती, 

आशा से तुमको सदा निहारती। 

भारत सारा, करे उजारा, 

पा तुमसे संस्कार।।

 

यह गीत आचार्य महाप्रज्ञ के ज्ञान, साधना और प्रेरणादायी जीवन को नमन करता है। उनके विचार और संस्कार आज भी समाज को आत्मजागरण और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा प्रदान करते हैं। 

🙏जय जिनेंद्र🙏