लोगस्स पाठ – लोगस्स उज्जोयगरे – अर्थ सहित (Logassa Paath – Logassa Ujjoyagare – With Meaning)

लोगस्स पाठ जैन धर्म की अत्यंत पूज्य और प्रभावशाली स्तुति है। इसमें चौबीस तीर्थंकर भगवानों के गुणों का स्मरण, वंदन और स्तवन किया गया है। यह पाठ हमें तीर्थंकरों के आदर्श जीवन, उनके ज्ञान, तप और करुणा की याद दिलाता है। श्रद्धापूर्वक लोगस्स का पाठ करने से मन में शांति, भक्ति और आत्मकल्याण की भावना जागृत होती है तथा मोक्षमार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

 

लोगस्स पाठ - लोगस्स उज्जोयगरे - अर्थ सहित

लोगस्स उज्जोयगरे, 

धम्मतित्थयरे जिणे।  

अरहंते कित्तइस्सं, 

चउवीसंपि केवली।।

 

उसभमजियं च वंदे, 

संभवमभिनंदणं च सुमइं च। 

पउमप्पहं सुपासं, 

जिणं च चंदप्पहं वंदे।।

 

सुविहिं च पुप्फदंतं, 

सीअल सिज्जंस वासुपुज्जं च। 

विमलमणंतं च जिणं, 

धम्मं संतिं च वंदामि।।

 

कुंथं अरं च मल्लिं, 

वंदे मुणिसुव्वयं नमिजिणं च। 

वंदामि रिट्ठनेमिं, 

पासं तह वद्धमाणं च।।

 

एवं मए अभिथुआ, 

विहुय-रयमला पहीणजर-मरणा। 

चउवीसंपि जिणवरा, 

तित्थयरा में पसीयंतु।।

 

कित्तिय वंदिय मए, 

जेए लोगस्स उत्तमा सिद्धा। 

आरोग्ग-बोहिलाभं, 

समाहिवरमुत्तमं दिंतु।।

 

चंदेसु निम्मलयरा, 

आइच्चेसु अहियं पयासयरा। 

सागरवरगंभीरा, 

सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु।।

 

लोगस्स पाठ - लोगस्स उज्जोयगरे का अर्थ (Hindi & English Meaning)

लोगस्स उज्जोयगरे, धम्मतित्थयरे जिणे।
जो संसार को ज्ञान का प्रकाश देने वाले और धर्मतीर्थ की स्थापना करने वाले जिन हैं।
The Jinas who illuminate the world with wisdom and establish the path of religion.

 

अरहंते कित्तइस्सं, चउवीसंपि केवली।।
मैं चौबीसों केवलज्ञान प्राप्त अरिहंत प्रभुओं की स्तुति करता हूँ।
I glorify all twenty-four Arihants who attained perfect knowledge.

 

उसभमजियं च वंदे, संभवमभिनंदणं च सुमइं च।
मैं ऋषभदेव, अजितनाथ, संभवनाथ, अभिनंदननाथ और सुमतिनाथ प्रभु को वंदन करता हूँ।
I bow to Rishabhdev, Ajitnath, Sambhavnath, Abhinandannath, and Sumatinath.

 

पउमप्पहं सुपासं, जिणं च चंदप्पहं वंदे।।
मैं पद्मप्रभु, सुपार्श्वनाथ और चंद्रप्रभु भगवान को नमस्कार करता हूँ।
I bow to Padmaprabhu, Suparshvanath, and Chandraprabhu.

 

सुविहिं च पुप्फदंतं, सीअल सिज्जंस वासुपुज्जं च।
मैं पुष्पदंत (सुविधिनाथ), शीतलनाथ, श्रेयांसनाथ और वासुपूज्य प्रभु को वंदन करता हूँ।
I bow to Pushpadanta (Suvidhinath), Shitalnath, Shreyansnath, and Vasupujya.

 

विमलमणंतं च जिणं, धम्मं संतिं च वंदामि।।
मैं विमलनाथ, अनंतनाथ, धर्मनाथ और शांतिनाथ भगवान को नमस्कार करता हूँ।
I bow to Vimalnath, Anantnath, Dharmanath, and Shantinath.

 

कुंथं अरं च मल्लिं, वंदे मुणिसुव्वयं नमिजिणं च।
मैं कुंथुनाथ, अरनाथ, मल्लिनाथ, मुनिसुव्रतनाथ और नमिनाथ प्रभु को वंदन करता हूँ।
I bow to Kunthunath, Aranath, Mallinath, Munisuvratanath, and Naminath.

 

वंदामि रिट्ठनेमिं, पासं तह वद्धमाणं च।।
मैं नेमिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर स्वामी को नमस्कार करता हूँ।
I bow to Neminath, Parshvanath, and Mahavira.

 

एवं मए अभिथुआ, विहुय-रयमला पहीणजर-मरणा।
मैंने उन प्रभुओं की स्तुति की है जिन्होंने राग-द्वेष को जीत लिया और जन्म-मरण से मुक्त हो गए।
I have praised those Lords who conquered attachment and are free from birth and death.

 

चउवीसंपि जिणवरा, तित्थयरा में पसीयंतु।।
वे चौबीसों तीर्थंकर प्रभु मुझ पर प्रसन्न हों।
May all twenty-four Tirthankaras be pleased with me.

 

कित्तिय वंदिय मए, जेए लोगस्स उत्तमा सिद्धा।
जिन श्रेष्ठ सिद्धों की मैंने स्तुति और वंदना की है।
I have praised and bowed to the supreme Siddhas of the universe.

 

आरोग्ग-बोहिलाभं, समाहिवरमुत्तमं दिंतु।।
वे मुझे आरोग्य, सम्यक् ज्ञान और उत्तम समाधि प्रदान करें।
May they bless me with health, right knowledge, and supreme inner peace.

 

चंदेसु निम्मलयरा, आइच्चेसु अहियं पयासयरा।
वे चंद्रमा से अधिक निर्मल और सूर्य से अधिक प्रकाश देने वाले हैं।
They are purer than the moon and more radiant than the sun.

 

सागरवरगंभीरा, सिद्धा सिद्धिं मम दिसंतु।।
वे महासागर के समान गंभीर सिद्ध मुझे मोक्ष का मार्ग दिखाएँ।
May the Siddhas, deep like the great ocean, show me the path to liberation.

 

इस पाठ का संदेश है कि तीर्थंकरों और सिद्धों के गुणों का स्मरण करके जीवन को पवित्र बनाया जाए। उनकी कृपा से सम्यक् ज्ञान, आरोग्य, शांति और आत्मोन्नति प्राप्त हो। 

🙏जय जिनेंद्र🙏