यह भक्ति गीत साध्वी राजीमतीजी द्वारा रचित है। इसमें भगवान महावीर के प्रति श्रद्धा, भक्ति और आत्मसमर्पण की भावना व्यक्त की गई है। गीत में भक्त प्रभु से अपने जीवन का कल्याण करने, मोह और क्रोध से बचाने तथा सही मार्ग दिखाने की प्रार्थना करता है। साथ ही अहिंसा, मैत्री और करुणा जैसे महान गुणों को अपनाने का संदेश भी दिया गया है।
करें हम वीर प्रभु का ध्यान
🎶 लय – धर्म की लौ जलाएँ हम
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी
करें हम वीर प्रभु का ध्यान।
करुणानिधि! करुणाकर!
तारो, कर दो अब कल्याण।।
अन्त किया आठों कर्मों का,
केवल दीप जलाया,
अतिशय धारी, पर उपकारी,
सोया शौर्य जगाया।
अजर अमर अविनाशी तुमने,
प्राप्त किया निर्वाण।।
चौरासी में घूम रहे हम,
कोई नहीं सहारा,
क्रोध मान की कुटिल चाल से,
सारा जग यह हारा।
पार लगाओ, द्वार दिखाओ,
हे प्यारे भगवान!
मैली चादर देख भक्त की,
आते मत सकुचाना,
मैंने शरण तुम्हारी ले ली,
तुमको सब कुछ माना।
सोया मन जग जाए अब तो,
दो ऐसा वरदान।।
जीवन का आदर्श अहिंसा,
मैत्रीमय बन जाऊं,
दुश्मन-दोस्त सभी पर मैं तो,
करुणा धार बहाऊं।
दीप ज्योति का भेद रहे ना,
तूं मैं एक समान।।
यह भजन हमें भगवान महावीर के बताए अहिंसा, दया और मैत्री के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आत्मविश्वास से जीवन को पवित्र बनाकर हम अपने भीतर शांति और प्रकाश का अनुभव कर सकते हैं
🙏जय जिनेंद्र🙏
