यह भजन हमें जीवन की सच्चाई बहुत सरल शब्दों में समझाता है। जीवन पानी की तरह बह जाता है, इसलिए समय का सही उपयोग करना चाहिए। धन, यौवन और परिवार हमेशा साथ नहीं रहते। शरीर भी एक दिन मिट्टी में मिल जाता है। इसलिए हमें अपने मन को शुद्ध बनाकर अच्छे कर्म करने चाहिए। यही जीवन को सफल और सार्थक बनाने का सच्चा मार्ग है।
जीवन ओ दो दिन रो पाणी ज्यूं बह ज्यासी
🎶 लय – होठों से छू लो तुम
जीवन ओ दो दिन रो, पाणी ज्यूं बह ज्यासी,
लारै जस अपजस री, बस बातां रह ज्यासी।।
धन जोबन परिजन रो, संजोग सुरंग मिल्यो,
ई तरूवर री डाळी, तूं फूल विशेष खिल्यो,
पण एक पून झटको, पटकी दे दहलासी।।
माटी री नगरी रा, नौ द्वार उघाड़ा हैं,
खिण खिण खिर री भीतां, नित पड़रया धाड़ा हैं,
मिटते ईं महतब स्यूं, कद तक मन बहलासी।।
पांचू कपड़ा थांरा, अणहुंता मैल भर्या,
कादै में रगदोल्या, नहीं धोकर साफ कर्या,
निज री निबलाई नै, के अब भी सहलासी।।
जद झोलो बाजैला, आ बगिया उजड़ैली,
हंसो उड़ ज्यावैला, पोलां सै उघड़ैली,
थारै कानां कहसी, बो जग नै कह ज्यासी।।
गिणती री सांसा रो, जो लाभ कमावैला,
अपणै ईं जीवन नै, बो सफल बणावैला,
‘मुनि बुद्ध’ सदा जग में, जय झंडो फहरासी।।
यह भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन बहुत छोटा है। इसलिए हर सांस का सदुपयोग करें, अच्छे कर्म करें और आत्मा की भलाई का मार्ग अपनाएँ। यही सच्ची सफलता और अमर पहचान है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
