यह भजन हमें जीवन की सच्चाई समझाता है। इसमें बताया गया है कि यह शरीर और जीवन हमेशा साथ नहीं रहते। इसलिए हमें घमंड, लालच और बुरे कामों से बचना चाहिए। धन कमाने के साथ-साथ धर्म, ईमानदारी और भगवान का नाम भी याद रखना चाहिए। यह भजन अच्छे कर्म करने, समय का सही उपयोग करने और सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
ई तन रो पल रो भरोसो नहीं
🎶 लय – रूं रूं बसे है म्हारे सांवरियो
ई तन रो, पल रो भरोसो नहीं, ई तन रो,
क्यूं इत्तो इतरावे, क्यूं दुष्कर्म कमावै,
कद दिवलो बुझ ज्यावै।।
दिन रात एक धुन, भाग्यो-भाग्यो फिरै है,
उड़ै है आकाश नदी, सागरां नै तिरै है।
हो पईसै रे खातर धरम गमावै-ई तन रो।।
मीठो मीठो बोले घणो, गाहकां रै सामनै,
ताकड़ी में तोलै जणां, भूल ज्यावै राम नै।
हो कलम नै क्यूं तलवार बणावै-ई तन रो।।
मोजां उड़ावै लोग, पाप कर्यो एकलो,
कोई ना बटावै हाथ, जांच कर देख लो।
हो बाल्मिकी घटना साफ सुणावै ई तन रो।।
एक सांस आयो भाई, दूसरे रो के पतो,
एक कोर खायो रहग्यो, दूसरे नै देखतो।
हो सपना अधूरा ही रह ज्यावै-ई तन रो।।
जाग-जाग पाळ पाणी, आयां पेली बांध लै,
टूट रह्या धागा कच्चा, सांधणा तो सांध लै।
हो ‘मधुकर’ साची बात बतावै ई तन रो।।
यह भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन बहुत छोटा है। इसलिए हर दिन अच्छे कर्म करें, भगवान का स्मरण करें और सच्चाई के मार्ग पर चलें। यही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
