यह भजन भगवान महावीर स्वामी की महानता, करुणा और उपदेशों को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे महावीर की शरण में आने से जीवन के दुःख दूर होते हैं और ज्ञान का प्रकाश प्राप्त होता है। संयम, कर्म और आत्म-शुद्धि का संदेश इस भजन का मूल भाव है। महावीर निर्वाण महोत्सव के पावन अवसर पर गाया जाने वाला यह भजन भक्तों के मन में श्रद्धा और भक्ति का भाव जागृत करता है।
धरती के बन गए देवता
🎶 लय – जहाँ डाल-डाल पर…
धरती के बन गए देवता,
क्या गुण-गरिमा गाएँ।
हम भक्ति थाल सजाएँ,
श्रद्धा से शीश झुकाएँ।।
जो आया महावीर शरण में,
उसके संकट कट गए,
पाकर तेरी ज्ञान-ज्योति को,
भ्रम के बादल फट गए।
मन के दीप जले लाखों के,
जीवन-दर्शन पाएँ।।
जनम-जनम से आँखें बिछाई,
बैठे राह में तेरी,
सुधि के दीप जलाए हमने,
मिट जाए भव फेरी।
डगमगाती नैया को भगवान!
अब तो पार लगाएँ।।
धन-वैभव-सत्ता से कोई,
ऊँच-नीच नहीं होता,
अपने ही कृत कर्मों द्वारा,
मानव हँसता-रोता।
संयम के दर्पण में अपना,
अंतर-रूप सजाएँ।।
महावीर ने साफ़ सुनाया,
अपना कौन पराया,
फिर झूठे इन सपनों में,
मन को कैसे भाँमाया।
तव-मम की दीवार तोड़कर,
आगे कदम बढ़ाएँ।।
मोर बुलाता ज्यों सावन को,
धर्ती चाँद बुलाती,
प्यासी ये हर साँस तुम्हारी,
जीवन-गीत सुनाती।
महावीर निर्वाण महोत्सव,
आओ आज मनाएँ।।
यह भजन हमें भगवान महावीर के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। संयम, करुणा और आत्मचिंतन से ही सच्चा सुख प्राप्त होता है। भक्ति भाव से गाया गया यह गीत मन को शांति और श्रद्धा से भर देता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
