यह सुंदर गीत तेरापंथ धर्मसंघ की महिमा, मर्यादा, त्याग और एकता का सरल वर्णन करता है। इसमें संतों के बलिदान, गुरु आज्ञा के प्रति श्रद्धा और संघ की मजबूत नींव को याद किया गया है। गीत बताता है कि यह शासन प्रेम, अनुशासन और समर्पण से बना है। इसकी छटा स्वर्ग जैसी सुंदर है और हर श्रद्धालु को गर्व और आनंद से भर देती है।
अलबेलो शासण थांरो - स्वर्गा सी है छटा निराली
🎶लय – जहाँ डाल-डाल पर…
अलबेलो शासण थांरो।
स्वर्गा सी है छटा निराली,
क्यूं नहीं अठै पधारो।।
कितां कितां ही संत सत्यां ने,
दी गण पर कुर्बानी।
बण्या नींव रा पत्थर उणरी,
सुणल्यो करूणा कहानी।
ओ नंदन वन खिल्यो सुरंगो,
नज़रयाँ इनै निहारो।।
उजली समकित पाई सब ने,
अपणो भाग सरावै।
है आचार विचार एकता,
गुरू आणां नित चावै।
महिमा फैली तेरापंथ री,
निरखण जिस्यो नजारो।।
मर्यादा रे शिखर स्तम्भ पर,
शासण महल खड़ो हैं।
सागर ज्यूं गहरो ओ गणवन,
हिम शिखरां स्युं बड़ो हैं।
गूंज रह्यो है नभ धरती पर,
जश कीरत रो नारो।।
खून पसीने स्यूं सींची,
मजबूत बणी गण नींवां।
गण बड़ला री छायां में,
म्हें बैठ्या अमृत पीवां।
ओ शासण समदरियो लागै,
‘मुनि सुरेश ने प्यारो।।
यह गीत हमें तेरापंथ की गौरवशाली परंपरा, संतों के त्याग और गुरु भक्ति का स्मरण कराता है। यह संदेश देता है कि एकता, मर्यादा और समर्पण से धर्मसंघ मजबूत, सुंदर और प्रेरणादायक बना रहता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
