जीवन रो, कांई है भरोसो भाई जीवन रो? (Jivan Ro Kai Hai Bharoso Bhai Jivan Ro?)

यह प्रेरक भजन हमें जीवन की सच्चाई बहुत सरल ढंग से समझाता है। जीवन का कोई भरोसा नहीं, इसलिए हमें अपने मन को साफ रखना चाहिए, अच्छे गुण अपनाने चाहिए और समता से जीना चाहिए। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, इसलिए उनसे अधिक जुड़ना ठीक नहीं। यह रचना हमें अपने भीतर झांकने, अवगुण छोड़ने और जीवन को सार्थक, शांत और सुंदर बनाने की सीख देती है।

 

जीवन रो, कांई है भरोसो भाई जीवन रो?

🎶लय – दिल करता

 

जीवन रो, कांई है भरोसो भाई जीवन रो? 

पल भर सांस न आवै, तो हंसो उड़ ज्यावै, 

माटी लोग जळावै।।

 

तन नै संवारे खूब मन रो तो मैला है, 

बातां में लाखीणो पण करणी में धेलो है, 

ओ… हीरै सी जिंदगी नै यूं ही गमावै।।

 

समता स्यूं जीणो है विषमता नै छोड़ दे, 

चेतना नै आज स्यूं ही एक नयो मोड़ दे, 

ओ… निज नै संभाळे बो ही लाभ कमावै।।

 

सुख दुख दोनूं थांरै आंता जांता पावणा, 

दोनूं ही ठगोरा है मूंदै के लगावणा?

ओ… सावधान रयां कोई नहीं भरमावै।।

 

अवगुणां नै भूल तूं गुणां नै याद राख ले, 

बारलो विसार स्वाद भीतरवाळो चाख ले, 

ओ… “बुद्ध” निज भावां नै ही उन्नत बणावै।।

 

अंत में भजन हमें याद दिलाता है कि जीवन अनमोल और क्षणभंगुर है। हमें बाहरी दिखावे से ऊपर उठकर अपने मन, गुण और भावों को सुधारना चाहिए, तभी जीवन सच्चे अर्थों में सफल बनता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏