यह भजन तपस्या की महिमा और उसके महत्व को सरल रूप में बताता है। इसमें कहा गया है कि कठिन काम वही पूरा करता है जो धैर्य, संयम और मेहनत रखता है। तप से मन शुद्ध होता है, लक्ष्य प्राप्त होता है और जीवन में शक्ति आती है। महान तपस्वियों के उदाहरण हमें प्रेरणा देते हैं और आत्मकल्याण का मार्ग हमेशा दिखाते हैं। इससे हमें सच्ची तपस्या की सीख मिलती है।
महा कठिन है काम तपस्या करता कोई बलवान रे
🎶लय – बड़े प्यार से मिलजुल सीखें
महा कठिन है काम तपस्या,
करता कोई बलवान रे।
बाते करना बहुत सरल है,
मुश्किल है बलिदान रे।।
तप की महिमा मुक्त कंठ से,
गाते शास्त्र मनस्वी,
नहीं भटकता गहन तिमिर में,
विजयी दिव्य तपस्वी,
मिल जाता, लक्ष्य स्वयं उसको जो,
करता अनुसंधान रे…
तपे तपस्वी देखो कितने,
एक-एक से भारी,
धनजी, शालिभद्र, काकंदी,
धन्ना की बलिहारी,
हम ध्यायें अ.भी.रा.शि.को. पीथल,
गुलजारी गुणगान रे…
काया कल्प सहज जीवन का,
शोधन तप के द्वारा,
आधि-व्याधि को दूर भगाता,
शुद्ध रसायन पारा,
भव सागर पार पहुंचाने को है,
तप अनुपम जलयान रे…
नमन उसी आत्मा को जो तप,
संयम में रत रहता,
भूख तृषा के भीष्म परीषह,
समता से जो सहता,
हम पायें ‘मुनि मणि तपज्योति से,
आत्म सिद्धि सोपान रे…
यह भजन हमें तप, संयम, धैर्य और समता का महत्व समझाता है। सच्ची तपस्या से मन और जीवन शुद्ध होते हैं। हमें भी कठिनाइयों में धैर्य रखकर आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।
🙏जय जिनेंद्र🙏
