यह रचना तपस्या की महिमा और उसके प्रभाव को ढंग से बताती है। इसमें तप से कर्मों की निर्जरा, मन पर नियंत्रण और आत्मबल बढ़ने की बात कही गई है। तप के साथ ध्यान, जप और अध्यात्म जीवन को सही दिशा देते हैं। रचना समझाती है कि सच्ची तपस्या से कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और आत्मा का विकास होता है।
तपस्या री महिमा देखो अपरंपार
🎶लय – आपणै भागां री
तपस्या री महिमा देखो अपरंपार,
करम निरजरा साथ में हुवै,
आधि-व्याधि उपचार।
लौ लागै अध्यात्म में झट,
सिद्ध हुवै साकार।
तपस्या री महिमा…
बाजीगर ज्यूं मिनख नै अै,
करम नचावै नाच,
एकमेक सा हो रया से,
पत्थर-हीरा-काच।
तपस्या री महिमा…
मन मुट्ठी में जो करै,
बो ही मानव मतिमान,
च्यार चांद तप स्यूं लगै,
जागै अंतर भगवान।
तपस्या री महिमा…
तप रो तेजस प्रगटज्या तो,
होवै काम कमाल,
श्रावक ज्यूं सेवा साजे नित,
देव-भूत-बेताल,
तपस्या री महिमा…
अनहद आतम बळ बढ़ै,
विपदा रो चलै न जोर,
दहन द्वारका रो रूक्यो,
चाल्यो जब तक तप दोर।
तपस्या री महिमा…
तप रै सागै ध्यान जप स्यूं,
‘मधुकर बढ़े प्रभाव,
तन्मय बण अजमाय ल्यो झट,
पार उतरसी नाव।
तपस्या री महिमा…
यह रचना हमें सिखाती है कि तपस्या, ध्यान और जप से मन मजबूत होता है। सच्चे भाव से किया गया तप आत्मबल, शांति और आध्यात्मिक प्रगति लाता है। इससे कठिन समय में धैर्य बढ़ता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
