यह भजन तपस्या की महान शक्ति को शब्दों में बताता है। इसमें कहा गया है कि तपस्या मंगलकारी है और जीवन के दुखों को दूर करती है। तप से पापों के बंधन टूटते हैं, आत्मा शुद्ध होती है और मन की उलझन मिटती है। सच्ची तपस्या करने वाला शांत, निर्भय और पवित्र बनता है। यह भजन हमें तप, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश देता है।
सब धर्मो में बतलाई रे तप री शक्ति महान
🎶लय – महाप्राण गुरूदेव
सब धर्मो में बतलाई रे, तप री शक्ति महान।
देवों ने गरिमा गाई रे, तप री शक्ति महान।।
तपस्या है मंगलकारी,
तपस्या है भवभय हारी।
तपस्या केशर री क्यारी रे।।
तप से टूटे अघबंधन,
आत्मा बन जाती कुंदन।
मिट जाती उलझन सारी रे।।
करता जो भाव तपस्या,
उसकी सब शांत समस्या।
बन जाते देव पुजारी रे।।
बाहर से टूटे नाता,
आत्मा का हो विज्ञाता।
बन जाता वह अविकारी रे।।
जो शूरवीर होते हैं,
वे ही तपस्या करते हैं।
तप से ‘प्रमोद’ इकतारी रे।।
यह भजन हमें सिखाता है कि तपस्या से आत्मा शुद्ध और जीवन शांत बनता है। हमें संयम, धैर्य और भावों के साथ तपस्या का मार्ग अपनाना चाहिए। इससे मन होता है और शांति आती है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
