लौट के लौट के आयेगा ना गुज़रा समां (Laut Ke Aayega Na Guzra Samaa)

यह गीत बीते समय, सपनों, अनजानी राहों और जीवन के उतार-चढ़ाव की बात करता है। इसमें बीते हुए सुंदर समय को याद किया गया है और सपनों में खो जाने से बचने की सीख दी गई है। गीत बताता है कि जीवन में अंधेरा और कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन उनके बाद उजाला, खुशी और नई उम्मीद भी जरूर आती है।

 

लौट के लौट के आयेगा ना गुज़रा समां

🎶लय – परदेसी परदेसी जाना नहीं 

 

लौट के लौट के आयेगा ना गुज़रा समां, 

ख्वाबो के समंदर में डुब ना जाना, 

डुब ना जाना, लिख जाना अफसानां।।

 

जिसको सच माना वो इक परछाई हैं, 

ये खुश मंजर सिर्फ, इक अंगड़ाई हैं, 

राहे अनजानी, मंजिल अनजाना है, 

इसी अजनबी डगर पे चमन सजाना हैं, 

ख्वाबो के…

 

दूर तलक अंधेरा ही अंधेरा है, 

अंधेरो में खतरो का बसेरा है, 

कहीं उजालो का भी नामोनिशान नहीं, 

रास्तो को खुद की भी पहचान नहीं, 

ख्वाबो के…

 

पतझड़ के बाद बहारे आयेगी, 

झुलसाती तपन बरखा लायेगी, 

गम का लम्हा, खुशीयों की शुरूआत है, 

रंजिश का मंजर, सुख का सौगात है, 

ख्वाबो के…

 

यह गीत हमें सिखाता है कि कठिन रास्तों और दुख के समय में भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। जीवन बदलता रहता है। हर अंधेरे के बाद उजाला और हर दुख के बाद खुशी आती है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏