यह भजन गणाधिपति के प्रति गहरी श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करता है। इसमें भक्त अपने आराध्य के आने की प्रतीक्षा करता है। मन की वीणा के तार भगवान के नाम से जुड़े हैं। भक्त अपनी प्यासी आँखों की प्यास बुझाने के लिए प्रभु को पुकारता है। उनके बिना मन उदास और बेचैन है। यह रचना प्रेम, विश्वास, विरह और प्रभु-मिलन की सुंदर भावना दिखाती है।
मन री वीणा रा तार शासण परवरदिगार
🎶लय – तुमसे लागी लगन
मन री वीणा रा तार शासण परवरदिगार,
आओ आओ, प्यासी आंख्या री प्यास बुझाओ।।
जाण्यो कुण देव इण विध सिधरसी,
पलक झपकता ही, सपना बिखरसी,
छोड़ अचानक गया, बिना कुछ ही कहया,
क्यूं बताऔ।।
आ ही घड़ी के के खुशी लयाती,
जश्ना ने परवान चढाती,
जार बस्या हो कठे, कहद्यो यो आर अठे,
एकर आऔ।।
धणी बगत स्यू बाट निहारे,
आंख्या, गणाधिपती कदे पधारे,
रह-रह यादा आवे, नेणां भर-भर जावे,
मत तड़पाऔ।।
यह भजन भक्त के सच्चे प्रेम और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है। प्रभु के दर्शन की आस में भक्त उन्हें बार-बार बुलाता है और अपनी विरह-व्यथा प्रकट करता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
