तुलसी अष्टकम् स्तोत्र – अर्थ सहित (Tulsi Ashtakam Stotra – With Meaning)

तुलसी अष्टकम् स्तोत्र आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा रचित एक भावपूर्ण संस्कृत स्तुति है, जिसमें आचार्य श्री तुलसी के महान व्यक्तित्व, आध्यात्मिक साधना, अनुशासन, दूरदर्शिता, करुणा और धर्मक्रांति का सुंदर वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र उनके जीवन के आदर्शों को उजागर करता है और हमें नैतिकता, आत्मअनुशासन, सेवा, विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा प्रदान करता है।

 

तुलसी अष्टकम् स्तोत्र - अर्थ सहित

✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री महाप्रज्ञ 

 

सदानंदस्पंदः प्रवहति मनोहारिवदने, 

प्रशस्तं वात्सल्यं स्फुरति सुखदं नेत्रयुगले। 

विकासे विन्यस्ता विमलविपुलादृष्टिरनिशं, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः।।

 

अनन्तं माहात्म्यं वचनविषयं केन विहितं, 

स्वयं सिद्धा वाणी सहजमतिमानाप्तपुरुषः। 

समृद्धो वाक्सिद्धेरतनुमहिमा सिद्धपुरुषः, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः।।

 

कृता धर्मक्रान्तिर्निरसनमिता भ्रान्तिरखिला, 

प्रतिष्ठां संप्राप्तं पुनरपि यतो मूल्यममलम्। 

स धर्मः किं धर्मो यदि न मनुजो नीतिनिपुणः, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः ।।

 

मनःपीठासीनः प्रथयसि मनः शान्तिमतुलां, 

वचः श्रेण्यारूढः सृजसि वचसो गौरवमलम्। 

मनोवाक्कायानां कथमिव सुयोगोऽजनि महान्, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः।।

 

अपूर्वा श्रीसंपत् प्रतिपदमहोभावमुखरा, 

अपूर्वा ह्रीसंपत् सहजमनुशास्तिं जनयति। 

अपूर्वा धीसंपत् स्मृतिरपि विचित्राशयवती, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः।।

 

अपूर्वा सा भक्तिर्जिनवरवचः ख्यातिमगमद्, 

अपूर्वा सा शक्तिः प्रबलपुरुषार्थे प्रकटिता। 

अपूर्वा सा शास्तिः प्रगतिमधिरूढा फलवती, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः।।

 

विकासस्य श्वासः प्रतिपलमनायासमुदितः, 

प्रतीक्षासंलीना इव नवनवोन्मेषनिवहाः। 

समीक्षानैपुण्यं सुकृतिसुलभं दुर्लभतमं, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः।।

 

श्रिये श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं जपतु तुलसीनामवलये, 

ह्रिये ह्रां ह्रीं ह्रौं ह्रः भवतु शिवनिष्ठा श्रुतवती। 

धिये ऐं ऐं ऐं ऐं स्फुरतु सततं कण्ठकमले, 

जगद्वंद्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसीः।।

 

तुलसी अष्टकम् स्तोत्र का अर्थ (Hindi & English Meaning)

सदानन्दस्पन्दः प्रवहति मनोहारिवदने,

उनके मनोहर मुख पर सदा आनंद की मधुर झलक दिखाई देती थी।

A gentle vibration of joy always flowed through his charming face.

 

प्रशस्तं वात्सल्यं स्फुरति सुखदं नेत्रयुगले।

उनकी दोनों आँखों में प्रेम, करुणा और वात्सल्य झलकता था।

His eyes radiated affection, compassion, and warmth.

 

विकासे विन्यस्ता विमलविपुलदृष्टिरनिशं,

उनकी निर्मल और विशाल दृष्टि सदैव विकास और प्रगति की ओर लगी रहती थी।

His pure and broad vision was constantly focused on growth and progress.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

अनन्तं माहात्म्यं वचनविषयं केन विहितं,

उनकी महानता इतनी विशाल थी कि उसका पूरा वर्णन करना कठिन है।

His greatness was so vast that it is beyond complete description.

 

स्वयं सिद्धा वाणी सहजमतिमानाप्तपुरुषः।

उनकी वाणी प्रभावशाली थी, उनकी बुद्धि स्वाभाविक थी और वे एक विश्वसनीय महापुरुष थे।

His speech was self-accomplished, his wisdom natural, and he was a trustworthy enlightened person.

 

समृद्धो वाक्सिद्धेरतनुमहिमा सिद्धपुरुषः,

वे वचन-सिद्धि से सम्पन्न थे और उनकी महिमा अपार थी।

He was blessed with mastery of speech, and his glory was immense.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

कृता धर्मक्रान्तिर्निरसनमिता भ्रान्तिरखिला,

उन्होंने धर्म के क्षेत्र में क्रांति लाकर अनेक भ्रांतियों को दूर किया।

He brought a revolution in religion and removed many misconceptions.

 

प्रतिष्ठां संप्राप्तं पुनरपि यतो मूल्यममलम्।

उनके कारण नैतिक मूल्यों की पुनः प्रतिष्ठा हुई।

Because of him, pure moral values were re-established.

 

स धर्मः किं धर्मो यदि न मनुजो नीतिनिपुणः,

यदि धर्म मनुष्य को नैतिक नहीं बनाता, तो वह सच्चा धर्म नहीं है।

If religion does not make a person ethical, it cannot be true religion.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

मनःपीठासीनः प्रथयसि मनःशान्तिमतुलां,

जब वे मन में स्मरण होते हैं, तब अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव होता है।

When remembered in the heart, he spreads incomparable inner peace.

 

वचःश्रेण्यारूढः सृजसि वचसो गौरवमलम्।

उनकी प्रेरणा से वाणी में गरिमा और श्रेष्ठता आती है।

His inspiration fills speech with dignity and excellence.

 

मनोवाक्कायानां कथमिव सुयोगोऽजनि महान्,

उनके जीवन में मन, वचन और कर्म का अद्भुत समन्वय था।

His life reflected a remarkable harmony of thought, speech, and action.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

अपूर्वा श्रीसंपत् प्रतिपदमहोभावमुखरा,

उनकी आभा ऐसी थी कि लोगों के मन में आदर और आश्चर्य भर जाता था।

His radiant presence inspired admiration and reverence at every step.

 

अपूर्वा ह्रीसंपत् सहजमनुशास्तिं जनयति।

उनकी विनम्रता और अनुशासन लोगों को स्वतः प्रेरित करते थे।

His humility and discipline naturally inspired others.

 

अपूर्वा धीसंपत् स्मृतिरपि विचित्राशयवती,

उनकी बुद्धि और स्मरणशक्ति अत्यंत विलक्षण थी।

His intellect and memory were truly extraordinary.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

अपूर्वा सा भक्तिर्जिनवरवचः ख्यातिमगमद्,

उनकी भक्ति ने जिनवाणी के संदेश को दूर-दूर तक पहुँचाया।

His devotion spread the teachings of the Jinas far and wide.

 

अपूर्वा सा शक्तिः प्रबलपुरुषार्थे प्रकटिता।

उनकी शक्ति उनके महान पुरुषार्थ में दिखाई देती थी।

His strength was revealed through his tireless efforts.

 

अपूर्वा सा शास्तिः प्रगतिमधिरूढा फलवती,

उनकी अनुशासन व्यवस्था ने प्रगति को नई ऊँचाइयाँ दीं।

His system of discipline led to fruitful progress and growth.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

विकासस्य श्वासः प्रतिपलमनायासमुदितः,

उनका विकास का अभियान निरंतर सहज रूप से आगे बढ़ता रहा।

His movement for development progressed naturally and continuously.

 

प्रतीक्षासंलीना इव नवनवोन्मेषनिवहाः।

नए-नए विचार मानो प्रकट होने की प्रतीक्षा में रहते थे।

New ideas seemed always ready to emerge.

 

समीक्षानैपुण्यं सुकृतिसुलभं दुर्लभतमम्,

उनकी समीक्षा और विश्लेषण की क्षमता अत्यंत दुर्लभ थी।

His skill in evaluation and analysis was exceptionally rare.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

श्रिये श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं जपतु तुलसीनामवलये,

तुलसी नाम का स्मरण करते हुए समृद्धि और मंगल की भावना जागृत रहे।

May the remembrance of Tulsi awaken prosperity and auspiciousness.

 

ह्रियै ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं भवतु शिवनिष्ठा श्रुतवती।

यह जप जीवन में विनम्रता, कल्याण और श्रेष्ठ निष्ठा को विकसित करे।

May this sacred chant cultivate humility, goodness, and noble dedication.

 

धिये ऐं ऐं ऐं ऐं स्फुरतु सततंकण्ठकमले,

ज्ञान और बुद्धि की ज्योति सदैव हमारे भीतर प्रकाशित रहे।

May the light of wisdom and knowledge always shine within.

 

जगद्वन्द्यः स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी।।

ऐसे उज्ज्वल चरित्र वाले तुलसी स्वामी पूरे विश्व में वंदनीय हैं।

Such was Tulsi Swami, revered throughout the world for his noble character.

 

यह स्तोत्र घंटाकर्ण महावीर की रक्षा-शक्ति और करुणा को प्रकट करता है। श्रद्धा से इसके पाठ और स्मरण से भय, रोग और बाधाएँ दूर होती हैं तथा साधक के जीवन में शांति और सुरक्षा बनी रहती है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏