उठ जाग थांरो जीवन यूं ही बीत्यो जा रयो (Uth Jaag Tharo Jivan Yu Hi Beetyo Ja Rayo)

यह प्रेरणादायक गीत मानव जीवन के महत्व को समझाते हुए जागरूकता, सदाचार और आत्मविकास का संदेश देता है। इसमें बताया गया है कि जीवन बहुत मूल्यवान है और समय तेजी से बीत रहा है। इसलिए व्यक्ति को अवगुणों का त्याग कर गुणों को अपनाना चाहिए। मित्रता, विनम्रता, सत्य, नैतिकता और उच्च लक्ष्य के साथ जीवन जीकर ही मानव जन्म को सफल बनाया जा सकता है। 

 

उठ जाग थांरो जीवन यूं ही बीत्यो जा रयो

🎶 लय – उमराव थांरो पेचो 

✍🏻 रचयिता – मुनि बुद्धमल्लजी 

 

उठ जाग थांरो जीवन यूं ही बीत्यो जा रयो, 

बड़भाग! अब तो देख मौत रो रेलो आ रयो। 

उठ जागज्या तूं बड़भाग।।

 

कला न जाणी जीण री, 

तो जीणो बेकार, 

मिनख बण्यां स्यूं के हुयो, 

जो पशु सो व्यवहार। 

संसार सारो सदाचार स्यूं शोभा पा रयो।।

 

फळे गुणां री बेलड़ी, 

बो ही करजै काम, 

काटी अवगुण री जड़ां, 

मन री कसी लगाम। 

गुणधाम रो जस च्यारूं ही कुंटां में छा रयो।।

 

कर सगळां स्यूं मित्रता, 

वैर-भाव दे छोड़, 

चार दिनां रो जीवणों, 

लगा न कोई खोड़। 

बेजोड़-जीवन ही दुनिया रै मन में भा रयो।।

 

निंदा-विकथा स्यूं सदा, 

दूर रहीजै भ्रात, 

ओछो बणकर मत करी, 

पर की ओछी बात। 

दिन-रात ऊंचैपण रा गुण सारो जग गा रयो।।

 

चाली ऊंचो लक्ष्य ले, 

रही निरन्तर नेक, 

‘बुद्ध’ निभाजै सांतरी, 

सदा साच री टेक। 

बस एक भलपण में ही सार समूचो मा रयो।।

 

यह गीत हमें समय का सदुपयोग करने, अच्छे गुणों को विकसित करने और सदैव सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रेष्ठ आचरण और भलमनसाहत ही जीवन की सच्ची सफलता का आधार हैं।

🙏जय जिनेंद्र🙏