गुरुवर ! थांरी याद सतावैजी (Guruvar! Thaari Yaad Sataaveji)

यह भजन आचार्य तुलसी के वियोग, स्मृति और उनके प्रति गहरी श्रद्धा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। रचयिता ने गुरु के तेजस्वी व्यक्तित्व, प्रेमपूर्ण दृष्टि और धर्मसंघ के लिए उनके महान योगदान का स्मरण किया है। भजन में उनके देवलोक गमन के बाद उत्पन्न विरह-वेदना भी झलकती है। साथ ही उनके अमर कार्यों, मानवता के प्रति सेवा और आध्यात्मिक विरासत को श्रद्धापूर्वक नमन किया गया है। 

 

गुरुवर ! थांरी याद सतावैजी

🎶 लय – सपनो

✍🏻 रचयिता – साध्वी फूलकुमारीजी (सुजानगढ़) 

 

गुरुवर! थांरी याद सतावैजी, 

याद सतावै आपरी, 

दिल ओ बण्यो दिलगीर। 

सोतां उठतां बैठतां, 

सपनां में आवै तस्वीर।।

 

तीर्थंकर सो तेज हो, 

नैणा बरसतो नेह। 

आभामण्डल ऊजळो, 

कंचन वरणी देह।।

 

काली घटा ई काळरी, 

आई चुपकै चाल। 

मिन्टा में सूरज छिप्यो, 

आयो क्यूं भूचाल।।

 

रहग्या सगळा देखता, 

चाल्यो नहीं उपचार। 

काची काया काच री, 

रुकग्यो प्राण संचार।।

 

शिखरां चढ़ायो संघ नै, 

जिन शासन री शान। 

मानवता रा त्राण हा, 

अमर बण्या अवदान।।

 

कृतियां कालजयी करी, 

शासन में तैयार। 

महाश्रमणी महाश्रमणजी, 

गणिवर गण आधार।।

 

भावां री श्रद्धांजलि, 

अर्पित श्रद्धा रा फूल। 

स्वर्गां में विराजिया, 

म्हानै मत जाइज्यो भूल।।

 

यह भजन आचार्य तुलसी के प्रति प्रेम, श्रद्धा और विरह का मार्मिक चित्र प्रस्तुत करता है। उनके आदर्श, योगदान और स्मृतियाँ आज भी भक्तों के हृदय में जीवित हैं तथा निरंतर प्रेरणा देती हैं। 

🙏जय जिनेंद्र🙏