हे दयालो! देव! तेरी शरण हम सब आ रहे (Hey Dayalo! Dev! Teri Sharan Hum Sab Aa Rahe)

यह भजन आचार्यश्री तुलसी द्वारा रचित एक सुंदर प्रार्थना है। इसमें भगवान की शरण ग्रहण करने, मन को शुद्ध बनाने और धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई है। भजन में मोह, अहंकार और ईर्ष्या जैसे दोषों को छोड़कर सद्गुणों को अपनाने का संदेश मिलता है। साथ ही, सद्गुरु भक्ति, सत्संग प्रेम, त्याग, शांति और समभाव से युक्त जीवन जीने की भावना व्यक्त की गई है। 

 

हे दयालो! देव! तेरी शरण हम सब आ रहे

🎶 लय – हे प्रभो ! आनन्ददाता

✍🏻 रचयिता – आचार्यश्री तुलसी

 

हे दयालो! देव! 

तेरी शरण हम सब आ रहे। 

शुद्ध मन से एक तेरा, 

ध्यान हम सब ध्या रहे।।

 

मोह मद ममता के त्यागी, 

वीतरागी, तुम प्रभो! 

हम भी उस पथ के पथिक हों, 

भावना यह भा रहे।।

 

सद्‌गुरु में हो हमारी, 

भक्ति सच्चे भाव से। 

धर्म रग-रग में रमे, 

उस ओर हम सब जा रहे।।

 

दिल से पापों के प्रति, 

प्रतिपल हमारी हो घृणा। 

प्रेम हो सत्संग से, 

यह लालसा दिल ला रहे।।

 

दूसरों की देख बढ़ती, 

हो न ईर्ष्या लेश भी। 

सर्वदा ग्राहक गुणों के हों, 

हृदय से गा रहे।।

 

त्यागमय जीवन बिताएं, 

शांतिमय बर्ताव हो। 

भाव हो समभाव, 

तेरापंथ ‘तुलसी’ पा रहे।।

 

यह प्रार्थना हमें आत्मशुद्धि, सदाचार और धर्ममय जीवन की ओर प्रेरित करती है। इसके भावों को जीवन में अपनाकर हम शांति, समभाव और सद्गुणों से युक्त श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण कर सकते हैं। 

🙏जय जिनेंद्र🙏