यह भावपूर्ण तप-गीत तपस्या के मंगलकारी स्वरूप का सुंदर वर्णन करता है। गीत में बताया गया है कि तप से पाप और संताप दूर होते हैं, जीवन में आनंद और उत्साह आता है तथा समता, त्याग और मधुरता जैसे गुण विकसित होते हैं। तपस्वी के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हुए यह रचना तप की उज्ज्वल साधना को जन-जन तक पहुँचाने का प्रेरणादायक संदेश देती है।
तप है मंगलकारी जी - तपसी रै घर बाग खिल्यो
🎶 लय – कल्पतरू रा बीज फल्या
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी
तपसी रै घर बाग खिल्यो,
अन्तर मनरो सपन फल्यो,
तपसी नै अब दर्शण देवण,
आओ म्हारा स्वामीजी।
थे ही अन्तर्यामी जी,
तप है मंगलकारी जी।।
पाप-ताप सब नाश करै,
जीवन में उल्लास भरै,
तपसी रो विश्वास जगावण,
आओ म्हारा स्वामीजी।
तप है मंगलकारी जी।।
तन री ममता त्यागै तपसी,
मन में समता राखै तपसी,
तपसी-जी रा भाव बढ़ावण,
आओ म्हारा स्वामीजी।
तप है मंगलकारी जी।।
होळे होळे चालै तपसी,
मीठो मीठो बोलै तपसी,
तप री उजळी ज्योत जलावण,
आओ म्हारा स्वामी जी।
तप है मंगलकारी जी।।
घर-घर में लागी रंग रळियां,
गूंज उठी गीतां स्यूं गळियां,
तपसी नै अमृत-रस पावण,
आओ म्हारा स्वामीजी।
तप है मंगलकारी जी।।
तपस्या री फुलवारी लागी,
तपसी री पुनवानी जागी,
आई जनता आज बधावण,
आओ म्हारा स्वामीजी।
तप है मंगलकारी जी।।
यह गीत तपस्या की महिमा का गुणगान करते हुए हमें त्याग, समता और आत्मशुद्धि की प्रेरणा देता है। तप के माध्यम से जीवन को मंगलमय बनाकर आत्मिक सुख प्राप्त करने का संदेश देता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
