तपस्या रो हेलो – एक बार आओ तप रा गीत आपां गावां (Tapasya Ro Helo – Ek Baar Aao Tap Ra Geet Aapa Gaava)

यह प्रेरणादायक तप-गीत जैन धर्म में तप, संयम और आत्मशुद्धि के महत्व को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है। गीत बताता है कि तपस्या से कर्मों का मैल दूर होता है, मन की वासनाएँ शांत होती हैं और आत्मा निर्मल बनती है। तप, विवेकपूर्ण आहार और संयमपूर्ण जीवन के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देते हुए यह गीत सभी को तप साधना के लिए प्रेरित करता है। 

 

तपस्या रो हेलो - एक बार आओ तप रा गीत आपां गावां

🎶 लय – अपने पिया की

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी

 

एक बार आओ, 

तप रा गीत आपां गावां। 

कर्मां रो मैल सारो धो पावां।। 

 

तप री नौका स्यूं, 

भव-जल तर ज्यावां। 

तप रा गीत आपां गावां।।

 

जनम जनम रा कष्ट काटै, 

तप संयम री साधना, 

काया कंचन-सी हो ज्यावै, 

मिटज्या मन री वासना। 

आओ तप की गंगा में, 

होऽऽऽऽ न्हाकर सुख पावां।।

 

खाणै में विवेक राख्यां, 

रोग सारा मिट ज्यावै, 

जीभड़ी रो स्वाद छोड्या, 

शेष संयम सध पावै। 

तपसी सन्तां रा आपां, 

होऽऽऽऽ गुण गावां।।

 

भैक्षव-गण में हुआ तपस्वी, 

एक-एक स्यूं जबरा हो, 

हो ज्यावो तैयार सारा, 

कसकर काठी कमरां हो। 

बरसै है रिमझिम सावण, 

हो ऽऽऽऽ आपां हरसावां।।

 

एक बास करणै वालो भी, 

कर्म खपावै है भारी, 

मासखमण कर लाखां ही, 

अपणी आत्मा नै तारी। 

महाप्रज्ञ शासण में सब, 

होऽऽऽऽ मौज मनावां।।

 

यह गीत हमें तप, त्याग और संयम का महत्व समझाकर आत्मकल्याण की राह दिखाता है। तपस्या के माध्यम से कर्मों का क्षय कर आत्मा को उज्ज्वल बनाने और सच्चे सुख की प्राप्ति का संदेश देता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏