तपस्या निराली रे देखो चमकै है, तपसी रो दीदार (Tapasya Nirali Re Dekho Chamke Hai, Tapsi Ro Didar)

यह भजन तपस्या की अद्भुत महिमा और संयम की शक्ति का सुंदर वर्णन करता है। साध्वी राजीमतीजी बताती हैं कि सच्ची तपस्या आत्मा को निर्मल बनाती है, विकारों को दूर करती है और मोक्षमार्ग की ओर ले जाती है। तपस्वी का जीवन धैर्य, समता और आत्मचिंतन से भरा होता है। यह भजन हमें तप, धर्म-ध्यान और संयम को अपनाकर जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा देता है। 

 

तपस्या निराली रे देखो चमकै है, तपसी रो दीदार

🎶 लय – सावन आयो रे

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी

 

तपस्या निराली रे, 

देखो चमकै है तपसी रो दीदार, 

खुल ज्यावै सुरगां री भी द्वार, 

मिट ज्यावै जनमां रा विकार। 

संयम री शक्ति, तपस्या निराली रे।।

 

करड़ो काम तपस्या रो, 

विरला ही कोई कर पावै, 

नाम सुण्यां ही जीवड़ो कांपै, 

धड़कन भी तो बढ़ ज्यावै। 

दीखै है दिन में तारा, 

आंख्यां में अंधियार, 

संयम री शक्ति, तपस्या निराली रे।।

 

धीरे-धीरे चालै तपसी, 

धीरे-धीरे बोलै है, 

अपनी धुन में बैठ्यो-बैठ्यो, 

भीतर गांठां खोलै है। 

समता रा दीप जलावै, 

समता ही सुखकार, 

संयम री शक्ति, तपस्या निराली रे।।

 

धर्म-ध्यान रो मेळो लाग्यो, 

होडा-होड लगाई है, 

गली-गली में तप री चर्चा, 

शासन माता आई है। 

भिक्षु रो शासण प्यारो, 

तुलसी रो आधार, 

संयम री शक्ति, तपस्या निराली रे।। 

 

इस भजन का संदेश है कि तपस्या और संयम आत्मकल्याण के श्रेष्ठ साधन हैं। जो व्यक्ति समता, धैर्य और धर्म-ध्यान को अपनाता है, वह अपने जीवन को पवित्र बनाकर आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।

🙏जय जिनेंद्र🙏