यह भजन तपस्या की महिमा और उसके प्रेरणादायक प्रभाव का सुंदर वर्णन करता है। साध्वी राजीमतीजी ने तपस्या की तुलना सावन के बरसते बादलों से की है, जो हर मन में नई उमंग और उत्साह भर देते हैं। भजन बताता है कि तप से आत्मबल बढ़ता है, जीवन में नई प्रेरणा मिलती है और साधक महान आदर्शों की ओर अग्रसर होता है।
तपस्या रो बादळियो बरस्यो
🎶 लय – बादळियो आंखड़ल्यां में
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमतीजी
तपस्या रो बादळियो बरस्यो,
बादळियो बरस्यो,
घोर घटा उमड़ाई है सावण में।
बोलो-बोलो भायां बायां,
कांई कांई करस्यो, कांई कांई करस्यो,
नई उमंगां आई है जन-जन में।।
तपसी रो तेज देख,
देव चकरावै है।
राजा और बादशाह भी,
शीष झुकावै है।
नई प्रेरणा पाई है,
जीवन में।।
खाणै रो तो स्वाद जाण्यो,
छोड़णे रो जाणल्यो,
एक अठाई करणी,
मन में पक्की ठाणल्यो।
देवां खूब बधाई म्है,
तपसण नै।।
भिक्षु-गण री ख्यात में,
लिखायो आज नाम है,
काया पर कुल्हाड़ी बाणी,
घणो करड़ो काम है।
हिम्मत जोर जगाई थे,
कण-कण में।।
तप रो अनोखो रंग,
छायो इण गांव में,
आवो आपां सागै बैठां,
तपस्या री नाव में।
कैसी झड़ी लगाई है,
शासण में।।
इस भजन का संदेश है कि तपस्या आत्मशक्ति, साहस और आत्मविकास का श्रेष्ठ मार्ग है। तप का प्रभाव पूरे समाज में प्रेरणा फैलाता है और साधकों को धर्म तथा संयम के पथ पर आगे बढ़ाता है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
