तप में तेज गजब रो भाई! आशा आंबो फळ ज्यावै (Tap Mein Tej Gajab Ro Bhai! Aasha Aambo Phal Jyave)

यह भजन तप की महिमा और उसकी अद्भुत शक्ति का सुंदर वर्णन करता है। रचयिता बताते हैं कि तप कर्मों का नाश करता है, मन को संयमित बनाता है और आत्मा की उन्नति का मार्ग खोलता है। तप के साथ ज्ञान, ध्यान और स्वाध्याय जुड़ जाएँ तो जीवन सफल बन जाता है। यह रचना साधक को तप अपनाकर आत्मकल्याण की प्रेरणा देती है। 

 

तप में तेज गजब रो भाई! आशा आंबो फळ ज्यावै

🎶 लय – माटी री आ काया

✍🏻 रचयिता – मुनि मधुकरजी 

 

तप में तेज गजब रो भाई! 

आशा आंबो फळ ज्यावै, 

संच्योड़े करमां रो कचरो, 

एक पलक में जळ ज्यावै। 

तप में तेज गजब रो भाई! 

आशा आंबो फळ ज्यावै।।

 

बै जनम जनम रा बंध्योड़ा, 

बंधन घालै भारी फोड़ा, 

अटकावै आगै बढ़ती, 

आत्मा रै मारग में रोड़ा। 

दौड़ा दौड़ मचावै तो भी, 

कोई नजर न हळ आवै।।

 

आलस में उलझयोड़ो मनड़ो, 

गोते पर गोता खावै, 

मदवै हाथी ज्यूं अंकुश स्यूं भी, 

वश में कोनी आवै। 

मंत्र हाथ में आज्या तप रो, 

पासो सूंवो ढळ ज्यावै।।

 

मोटा-मोटा रोग मिटै, 

तनड़ो बण ज्यावै कंचन सो, 

अंतर-शोधन स्यूं लागै, 

शीतल मलयाचल चंदन सो। 

शूर-सिपाही री सरणी आ, 

कायर दूरा टळ ज्यावै।।

 

ज्ञान, ध्यान, स्वाध्याय साथ में, 

जप माळा रो ले शरणो, 

चोरासी रे चक्कर स्यूं जदि, 

चावै है जल्दी तरणो। 

मधुकर’ चढ़ तप नाव सामने, 

जीवन ओ पल-पल ज्यावै।।

 

संदेश यही है कि तप आत्मा का सच्चा मित्र है। यह कर्मों को जलाकर मन को निर्मल बनाता है। जो तप, ज्ञान और ध्यान का सहारा लेता है, वह मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏