ॐ जय कालू – जन-मन का मानस गाए (Om Jai Kalu – Jan-Man Ka Maanas Gaaye)

यह भजन आचार्यश्री तुलसी द्वारा रचित एक प्रेरणादायक श्रद्धा-गीत है। इसमें आचार्य कालूगणी के वात्सल्य, अनुशासन, दूरदृष्टि और आदर्श व्यक्तित्व का सुंदर चित्रण किया गया है। भजन हमें परिश्रम, जागरूकता, संघ-सेवा और श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। श्रद्धा और भक्ति से भरा यह गीत जन-मन को नई चेतना और उत्साह प्रदान करता है।

 

ॐ जय कालू - जन-मन का मानस गाए

🎶 लय – प्रभो! तुम्हारे पावन पथ पर 

✍🏻 रचयिता – आचार्यश्री तुलसी

 

ॐ जय कालू ॐ जय कालू, 

जन-मन का मानस गाए। 

श्रद्धा भरा समंदर देखो, 

गण के आंगन में लहराये।।

 

अपरिमेय वात्सल्य निहारा, 

हमने प्रभु की आंखों में, 

अमित शक्ति संचार किया, 

गुरुवर ने कितनी पांखों में। 

नई प्रेरणा के सिंचन से, 

कितने ही उपवन सरसाये।।

 

जन्मजात संस्कार सलोने, 

दिये दिखाई हर कृति में, 

स्वाभिमान की झलक प्रकट, 

होती रहती थी आकृति में। 

मस्त सदा अपनी ही धुन में,

नये-नये आदर्श दिखाये।।

 

संघ-सुरक्षा और व्यवस्था, 

पर पहले से ध्यान रहे, 

कितने गहरे पानी में है कौन? 

सदा पहचान रहे। 

सक्रिय शिक्षण दिया देव ने, 

हम सब जीवन में अपनाएं।।

 

मंजिल मिलती उसे सुनिश्चित, 

अगर लगन मन में जागे, 

मजबूती से रखे पैर को, 

दृष्टि रहे पल-पल आगे। 

शम सम श्रम के संगम में, 

कर स्नान श्रमण सच्चे कहलाएं।।

 

हृदय-हार आराध्यदेव के, 

सपनों को साकार करें, 

अपने जीवन व्यवहारों से, 

कण-कण में आलोक भरें। 

‘तुलसी’ जन्म-शताब्दी छापर में, 

हम श्रद्धा के सुमन चढ़ायें।।

 

यह भजन हमें श्रद्धा, अनुशासन, परिश्रम और आदर्श जीवन अपनाने की प्रेरणा देता है। आचार्य कालूगणी के गुणों को स्मरण कर जीवन में उजियारा भरने का संदेश मिलता है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏